पटना । Janata Dal (United) के संगठनात्मक चुनाव में बड़ा फैसला सामने आया है। वैशाली जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र से विधायक (Umesh Singh Kushwaha) को एक बार फिर पार्टी की बिहार इकाई का प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया गया है। इस पद के लिए किसी अन्य नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके कारण उनका चयन निर्विरोध हो गया। नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हुई। चुनाव अधिकारी (Ashok Kumar ‘Munna’) और Paramhans Kumar की मौजूदगी में सभी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। इसके बाद शाम करीब चार बजे उनके निर्विरोध चुने जाने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
तीसरी बार मिली संगठन की कमान
यह लगातार तीसरी बार है जब Umesh Singh Kushwaha को पार्टी की बिहार इकाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले लगभग पांच वर्षों से वे संगठन की कमान संभाल रहे हैं और उन्हें मुख्यमंत्री (Nitish Kumar) के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है।
नामांकन के दौरान मौजूद रहे वरिष्ठ नेता
नामांकन के समय पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। प्रस्तावकों में मंत्री Leshi Singh, पूर्व मंत्री Ratnesh Sada, Sheela Mandal और Poonam Sinha शामिल थे। इसके अलावा राज्य मंत्री Ramnath Thakur, मंत्री Shravan Kumar और विधान परिषद के मुख्य सचेतक Sanjay Kumar Singh समेत कई नेता कार्यक्रम में उपस्थित रहे। पूरी प्रक्रिया सर्वसम्मति और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।
2021 से संभाल रहे हैं अध्यक्ष पद
राजनीतिक सफर की बात करें तो Umesh Singh Kushwaha को पहली बार वर्ष 2021 में जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय उन्होंने वरिष्ठ नेता Vashishtha Narayan Singh की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 2022 में उन्हें दोबारा इस पद पर चुना गया और अब 2026 में वे तीसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। वे Mahnar विधानसभा सीट से 2015 और 2025 में विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि 2020 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा और संगठन की कमान सौंपी।
‘लव-कुश’ समीकरण में अहम भूमिका
सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी कुशवाहा को पार्टी में अहम माना जाता है। वे कोइरी समुदाय से आते हैं और बिहार की राजनीति में प्रभावी माने जाने वाले ‘लव-कुश’ समीकरण में ‘कुश’ पक्ष को मजबूत करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। जब कई बड़े कोइरी नेता, जिनमें Upendra Kushwaha भी शामिल हैं, अलग राह पर चले गए, तब भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।
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पार्टी में एकजुटता का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह चुनाव ऐसे समय हुआ है जब Bihar की राजनीति में कई घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में कुशवाहा का निर्विरोध अध्यक्ष बनना पार्टी के भीतर एकजुटता और नेतृत्व पर भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
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