National: युद्धपोत बनाने की तयारी शुरू, चीन को मिलेगा ऐसे जवाब

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हिंदमहासागर में भारत अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है इस बिच पाकिस्तान सहित अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय जल सेना अपने बड़े में 12 नए ताकतवर युद्ध पोत जोड़ने की तयारी कर रहा है। सभी नए युद्धपोतों को भारत स्वदेशी तकनिकी से बनाएगा

चीन को मिलेगा जवाब, भारत में बनेंगे 12 नए युद्धपोत

नई दिल्ली: हिंद महासागर में चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए अब भारत अपनी नौसेना को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत अब देश में ही 12 खास युद्धपोत बनाए जाएंगे। ये युद्धपोत दुश्मन द्वारा बिछाई गई पानी के अंदर की बारूदी सुरंगों को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर देंगे। इससे बंदरगाहों और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लगभग 44,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन 12 आधुनिक माइनस्वीपर (MCMVs) के प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा अधिग्रहण परिषद के सामने रखा जाएगा।

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली यह परिषद इस परियोजना को मंजूरी देगी। इसके बाद, भारतीय शिपयार्ड से तकनीकी और व्यावसायिक बोलियां मंगाई जाएंगी। एक सूत्र ने बताया कि अनुबंध होने के बाद पहले MCMV को बनने में कम से कम सात से आठ साल लगेंगे।

MCMV की जरूरत क्यों है?


चीन की परमाणु और सामान्य पनडुब्बियां हिंद महासागर क्षेत्र में आती रहती हैं। ये पनडुब्बियां साजिश के तहत बारूदी सुरंगें बिछा सकती हैं। पाकिस्तान भी अपनी पनडुब्बी ताकत बढ़ा रहा है। वह चीन से 8 नई युआन-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीद रहा है।

भारतीय नौसेना के पास अभी एक भी MCMV नहीं है। पहले 6 करवार-क्लास और दो पांडिचेरी क्लास के माइनस्वीपर थे, लेकिन वे कई साल पहले रिटायर हो गए। नौसेना अभी कुछ जहाजों पर ‘क्लिप-ऑन माइन काउंटरमेजर सूट’ लगाकर काम चला रही है।

लेकिन, देश की 7516 किलोमीटर लंबी तटरेखा , 13 बड़े बंदरगाहों और 200 से अधिक छोटे बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए 24 MCMVs की जरूरत है।

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लेखक परिचय

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