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USA- ईरान की मिसाइलों में रूस के ‘फिंगरप्रिंट’ मिलने के संकेत

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 12, 2026 • 5:49 PM
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वाशिंगटन,। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दागी गई ईरानी मिसाइलों (Iran Missiles) को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। जांच में संकेत मिले हैं कि इन मिसाइलों के निर्माण में रूसी तकनीकी सहयोग शामिल हो सकता है। मिसाइलों के मलबे की जांच के दौरान विशेषज्ञों को ऐसे तकनीकी संकेत मिले हैं, जिनसे रूस और सोवियत दौर की सैन्य तकनीक के उपयोग की आशंका जताई जा रही है।

मिसाइलों के मलबे की जांच में मिले संकेत

मीडिया रिपोर्टों (Media Reports) के अनुसार जांच में सामने आया है कि इन मिसाइलों की डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया में रूसी विशेषज्ञों की तकनीकी छाप दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हथियारों के विकास में सोवियत काल की सैन्य तकनीक का भी उपयोग किया गया हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान ने इन मिसाइलों को पूरी तरह अकेले विकसित नहीं किया है।

ट्रंप का दावा—युद्ध जल्द खत्म हो सकता है

इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति (Donald Trump) ने एक बार फिर दावा किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब वह चाहेंगे तब यह युद्ध खत्म हो जाएगा और अब ईरान में निशाना बनाने के लिए बहुत कम लक्ष्य बचे हैं। हालांकि उनके इस बयान के बावजूद क्षेत्र में सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है।

अमेरिका के साथ अभियान जारी रखेगा इजराइल

इजराइल ने भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा सैन्य अभियान फिलहाल जारी रहेगा। इजराइली अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई तब तक चलती रहेगी जब तक तय किए गए सभी सैन्य लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।

ऊर्जा बाजार पर भी दिखा युद्ध का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस महीने भारत ने लगभग 15 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा, जबकि फरवरी में यह मात्रा करीब 10.40 लाख बैरल प्रतिदिन थी।

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भारत की ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है और अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

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