कांवड़ यात्रा 2025: उत्तर प्रदेश के इन जिलों में स्कूल बंद

By digital | Updated: July 15, 2025 • 12:51 PM

सावन का पवित्र माह शुरू होते ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ (Kanwar Yaatra) यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। इस वर्ष, 16 जुलाई से शुरू होने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए राज्य के 16 जिलों में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला कांवड़ियों की सुविधा, यातायात प्रबंधन और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन ले रहें भाग

कांवड़ यात्रा, जिसमें लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर पैदल चलकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं, उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले जैसे मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बागपत, और मुरादाबाद इस यात्रा के प्रमुख मार्ग हैं। मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने 16 से 23 जुलाई तक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी किया है। इस दौरान प्राथमिक, माध्यमिक, सीबीएसई, आईसीएसई स्कूलों के साथ-साथ डिग्री कॉलेज, मदरसे और आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे।

यूपी में किये गए हैं ख़ास इंतजाम

अन्य जिलों में भी समान व्यवस्था देखी जा रही है। बरेली और बदायूं में सावन के प्रत्येक सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे, जबकि मुरादाबाद में कुछ निश्चित तिथियों पर अवकाश घोषित किया गया है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास भारी भीड़ को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने यात्रा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें रूट डायवर्जन, अस्थायी अस्पताल, मोबाइल टॉयलेट, और ड्रोन निगरानी शामिल हैं।

हालांकि, इस निर्णय ने कुछ विवाद भी खड़ा किया है। कांग्रेस जैसे संगठनों ने इसे धार्मिक पक्षपात का मुद्दा बताया है। पिछले वर्ष मेरठ में कांवड़ियों द्वारा स्कूल बस तोड़ने और बरेली में एक शिक्षक पर कांवड़ यात्रा के खिलाफ कविता पढ़ने के आरोप से उत्पन्न विवाद ने भी चर्चा बटोरी थी।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने कांवड़ यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। मेरठ के जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जरूरी है। कांवड़ यात्रा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाती है।

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सावन में कावड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है?

कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. सावन के महीने की कांवड़ यात्रा में शिवभक्त अपनी अपनी श्रद्धानुसार कांवड़ उठाते हैं. माना जाता है कि सावन में जो भी शिवभक्त सावन कांवड़ यात्रा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.


कावड़ यात्रा के क्या नियम हैं?

कांवड़िए यात्रा के दौरान अपने बाल न कटाएं और न ही शेव करानी चाहिए. इस पवित्र यात्रा पर जाने से पहले श्रद्धालुओं को अपने फुल बॉडी हेल्थ चेकअप एकबार जरूर करानी चाहिए. क्योंकि यह पद यात्रा होती है, जिसमें आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है.

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