नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच अब उस संभावित इनसाइडर नेटवर्क (Insider Network) पर केंद्रित हो गई है, जिसने परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाने में भूमिका निभाई हो सकती है। इसी कड़ी में जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र के पुणे से एक महिला और लातूर से एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर को हिरासत में लिया है। मामले में अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।सीबीआई (CBI) यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा। एजेंसी को आशंका है कि लीक की जड़ें परीक्षा प्रणाली के भीतर तक फैली हो सकती हैं।
NTA से मांगी गई अहम जानकारी
जांच को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से उन सभी लोगों का ब्योरा मांगा है, जिन्हें पेपर सील होने से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच प्राप्त थी। जांच के दायरे में विषय विशेषज्ञ, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले प्रोफेसर और अनुवाद पैनल से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं। एजेंसी प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा में सेंध किस स्तर पर लगी।
पुणे की महिला और प्रोफेसर जांच के घेरे में
सीबीआई ने पुणे के सुखसागर नगर इलाके से मनीषा वाघमारे नामक महिला को गिरफ्तार किया है, जो एक ब्यूटी पार्लर संचालित करती है। जांच में सामने आया है कि वह कथित तौर पर मुख्य आरोपी धनंजय के लिए बिचौलिए की भूमिका निभा रही थी। एजेंसी को उसके बैंक खातों में कई संदिग्ध लेन-देन के सुराग भी मिले हैं। वहीं लातूर से हिरासत में लिए गए सेवानिवृत्त प्रोफेसर दयानंद सागर कॉलेज से जुड़े रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने प्रश्नपत्र का मराठी अनुवाद किया था। चूंकि नीट परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित होती है, इसलिए अनुवाद प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है। जांच एजेंसियों को शक है कि लीक की कड़ी यहीं से जुड़ी हो सकती है।
मॉक टेस्ट से खुला बड़ा राज
लातूर में एक अभिभावक की शिकायत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक निजी कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट के 42 सवाल हूबहू नीट परीक्षा में पूछे गए सवालों से मेल खाते थे। सीबीआई अब कोचिंग संस्थान और गिरफ्तार प्रोफेसर के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। इस खुलासे के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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राजस्थान और गुड़गांव तक फैला नेटवर्क
राजस्थान से गिरफ्तार आरोपियों में दिनेश बिवाल पर आरोप है कि उसने लीक हुए प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी को स्कैन कर डिजिटल रूप में शेयर किया। जांच में सामने आया है कि उसे यह पेपर गुड़गांव निवासी यश यादव से मिला था। बताया जा रहा है कि पेपर पहले उसके बेटे तक पहुंचाया गया और बाद में सीकर जिले के कई छात्रों को बेचा गया।
CBI ने बताया राष्ट्रव्यापी साजिश
दिल्ली की एक अदालत में पेशी के दौरान सीबीआई ने इस पूरे मामले को एक संगठित राष्ट्रव्यापी साजिश बताया। एजेंसी ने अदालत से आरोपियों की रिमांड मांगते हुए कहा कि पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों का खुलासा करने के लिए गहन पूछताछ जरूरी है। सीबीआई ने यह आशंका भी जताई है कि इस नेटवर्क में एनटीए के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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