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Kullu में मलाणा डैम हादसा: बाढ़ से तबाही, गाड़ियाँ बहीं, राहत कार्य जारी

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Updated: August 2, 2025 • 11:55 AM
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कुल्लू, हिमाचल प्रदेश, 2 अगस्त 2025: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू (Kullu)जिले में मलाणा-I हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट (Hydro Power Projact) का एक कॉफर डैम 31 जुलाई 2024 की रात बादल फटने और भारी बारिश के कारण आंशिक रूप से टूट गया, जिससे पार्वती नदी में अचानक बाढ़ आ गई। इस घटना ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई, जिसमें कई गाड़ियाँ—एक हाइड्रा, एक डम्पर, एक रॉक ब्रेकर, और एक कैंपर या कार—पानी के तेज बहाव में बह गए। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है

क्या हुआ था?

31 जुलाई की रात करीब 11 बजे मलाणा क्षेत्र में बादल फटने से मलाणा नाले और पार्वती नदी में जलस्तर अचानक बढ़ गया। भारी बारिश और सिल्ट के कारण मलाणा-I हाइड्रो प्रोजेक्ट का कॉफर डैम पानी के दबाव को नहीं झेल सका और आंशिक रूप से ढह गया। इस बाढ़ ने न केवल प्रोजेक्ट की संरचनाओं को नुकसान पहुँचाया, बल्कि आसपास के इलाकों में भी अफरातफरी मचा दी। पार्वती घाटी में कई अस्थाई पुल बह गए, और बाढ़ का पानी निचले इलाकों में बस्तियों तक पहुँच गया।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दिखा कि तेज बहाव के साथ पानी ने सड़कों, पुलों, और आसपास की संरचनाओं को तहस-नहस कर दिया। कुल्लू जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भुंतर और आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया, जिसमें लोगों को नदियों और नालों से दूर रहने की सलाह दी गई

क्षति का आकलन


गाड़ियाँ बहीं: बाढ़ के तेज बहाव में एक हाइड्रा, डम्पर, रॉक ब्रेकर, और एक कार बह गई

संरचनाओं को नुकसान: मलाणा-I प्रोजेक्ट की बैराज कंट्रोल रूम, इनटेक गेट्स, और डिसिल्टिंग चैंबर्स को भारी नुकसान हुआ। प्रोजेक्ट की सड़कें, पुल, और 132 केवी स्विचयार्ड सहित कई संरचनाएँ पूरी तरह बर्बाद हो गईं।

आसपास के इलाके प्रभावित:

पार्वती नदी के किनारे बसे गाँवों, जैसे बलधी, में घरों और होमस्टे को नुकसान पहुँचा। मणिकर्ण घाटी में एक सब्जी मंडी भी बाढ़ में बह गई।

मलाणा-I (86 मेगावाट) और मलाणा-II (100 मेगावाट) प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान हुआ। बैराज कंट्रोल रूम, इनटेक गेट्स, और स्विचयार्ड बह गए। कुल्लू प्रशासन ने तुरंत NDRF, पुलिस, और होम गार्ड की टीमें तैनात कीं। मलाणा-I की टनल में फँसे 33 कर्मचारियों में से 29 को 1 अगस्त को बचा लिया गया, और शेष चार को 2 अगस्त को निकाला गया। उपायुक्त तोरुल एस. रविश ने प्रभावितों को 1.5 लाख रुपये की अंतरिम राहत और स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की।

पर्यावरणविदों ने हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि डैम सेफ्टी एक्ट का पालन नहीं हो रहा। स्थानीय लोग मलाणा गाँव की कनेक्टिविटी और राशन की बढ़ती कीमतों से चिंतित हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र से मदद माँगी, और गृह मंत्री अमित शाह ने सहायता का आश्वासन दिया। राहत कार्य जारी हैं, लेकिन बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बरकरार है। यह घटना हिमाचल में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की कमजोरियों को उजागर करती है।

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