National- भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मनीष तिवारी का स्थगन प्रस्ताव, तत्काल चर्चा की मांग

By Anuj Kumar | Updated: February 4, 2026 • 1:29 PM

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच कथित व्यापार समझौते को लेकर संसद के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Manish Tiwari) ने बुधवार को लोकसभा में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने लोकसभा महासचिव को पत्र लिखकर प्रश्नकाल, शून्यकाल समेत दिन की सभी कार्यवाहियां स्थगित कर इस गंभीर विषय पर बहस की अनुमति देने की मांग की।

राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला

मनीष तिवारी ने अपने पत्र में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सीधे तौर पर राष्ट्रीय हित, आर्थिक सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा विषय है। ऐसे में इस पर संसद को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी और खुली चर्चा बेहद जरूरी है।

प्रधानमंत्री की सहमति के दावे पर सवाल

कांग्रेस सांसद ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति (Americi President) की ओर से कथित तौर पर यह दावा किया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री इस व्यापार समझौते की शर्तों पर सहमत हो गए हैं। तिवारी के अनुसार, यह दावा बेहद गंभीर है और इसकी सच्चाई संसद के पटल पर सामने आनी चाहिए।

रूसी तेल और टैरिफ को लेकर गंभीर आरोप

मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने, भारतीय टैरिफ (India Tarrif) और गैर-टैरिफ बाधाओं को लगभग शून्य करने और 500 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। उन्होंने चेताया कि यदि यह सच है, तो इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं।

आम जनता और उद्योगों पर पड़ सकता है असर

तिवारी ने कहा कि रूसी कच्चे तेल की खरीद से देश में ईंधन की कीमतों को काबू में रखने में मदद मिली है। अगर इसमें अचानक बदलाव हुआ, तो आम नागरिकों, परिवहन क्षेत्र और उद्योगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके साथ ही बड़े व्यापार समझौते से घरेलू विनिर्माण, किसानों और एमएसएमई सेक्टर को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

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सरकार से पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर तुरंत स्थिति स्पष्ट करने और संसद में विस्तृत चर्चा की अनुमति देने की मांग की। उन्होंने कहा कि व्यापार, ऊर्जा और विदेश नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना पारदर्शिता लिए गए फैसले देशहित के खिलाफ हो सकते हैं।

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