Haridwar : भगदड़ के बाद फिर खुला मनसा देवी मंदिर

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श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खुले

Haridwar : भगदड़ की घटना के बाद मनसा देवी (mansa devi) मंदिर को श्रद्धालुओं (Devotees) के लिए फिर से खोल दिया गया है। सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों पर अभी भी रोक है

सीढ़ियों वाला पैदल मार्ग अस्थायी रूप से बंद

Haridwar : मंदिर प्रशासन ने बताया कि सीढ़ियों वाला मुख्य पैदल मार्ग फिलहाल बंद रखा गया है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी भी तरह की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

Haridwar : हरिद्वार रविवार को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सोमवार को मनसा देवी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। आज भी सोमवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से किए गए पुख्ता इंतजामों के कारण स्थिति पूरी तरह काबू में है। रविवार की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने मंदिर की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को प्राथमिकता दी गई है।

अलग प्रवेश और निकास मार्ग

सीढ़ियों की ओर से आने वाले पैदल मार्ग को मंदिर में प्रवेश के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। दूसरे पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं। इससे भीड़ को एक ही जगह जमा होने से रोका जा रहा है।

चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात 

मंदिर परिसर के शुरुआती गेट से लेकर पूरे रास्ते और मंदिर परिसर के अंदर तक हर जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। रविवार को केवल शुरुआती गेट और मंदिर परिसर में ही पुलिस की तैनाती थी, जिससे भीड़ को काबू करने में मुश्किल हुई थी।

भीड़ पर काबू करने की कोशिश 

आज भीड़ को शुरुआती बैरिकेडिंग से ही काबू करने का प्रयास किया जा रहा है। अत्यधिक भीड़ होने पर श्रद्धालुओं को पहले ही रोक दिया जा रहा है, ताकि मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ जमा न हो। हालांकि आज भी भीड़ इतनी है कि पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है।

भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत

बता दें कि उत्तराखंड के हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर क्षेत्र में रविवार को भगदड़ मच जाने से 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सीएम धामी ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए और मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की। घटना के बाद धामी ने हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचकर अस्पतालों में घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।

माता मनसा देवी का इतिहास क्या है?

माना जाता है कि मां मनसा देवी भगवान शिव की मानस पुत्री हैं। उन्हें सर्पों की देवी भी कहा जाता है, क्योंकि वे अक्सर नागों के साथ चित्रित की जाती हैं। उनके पुत्र आस्तिक ने नाग जाति की रक्षा की थी। मान्यता है कि मां मनसा देवी की पूजा से सर्पदंश जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

मनसा देवी मंदिर में सती का कौन सा भाग गिरा था?

कहा जाता है कि जिस स्थान पर आज माता मनसा देवी मंदिर है, वहाँ सती माता के सिर का अगला भाग गिरा था। मनसा देवी मंदिर को पहले माता सती के मंदिर के नाम से जाना जाता था।

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Surekha Bhosle

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Surekha Bhosle

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