Naxalism end deadline : गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद खत्म करने की तय की गई समयसीमा नजदीक आते ही, माओवादी संगठनों ने एक अप्रत्याशित अनुरोध किया है। महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ विशेष ज़ोनल कमेटी के सदस्यों ने केंद्र और तीनों राज्य सरकारों से 15 फरवरी 2026 तक का समय मांगा है, ताकि वे “हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने” पर सामूहिक निर्णय ले सकें।
22 नवंबर को जारी और 24 नवंबर को सार्वजनिक हुई इस चिट्ठी में प्रवक्ता ‘अनंत’ ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा है कि यदि वे कॉम्बिंग ऑपरेशन रोक दें, तो उनके लिए बिना किसी घटना के समर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आसान होगा।
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अनंत ने अपने पत्र में उस निर्णय का उल्लेख किया है, जिसे दो महीने पहले पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेंगोपल राव ‘सोनू’ ने लिखा था। (Naxalism end deadline) सोनू ने कहा था कि बदलते हालात में पार्टी को बचाने के लिए हथियारबंद लड़ाई रोकना ही बेहतर है। अक्टूबर में उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में कई नेताओं ने हथियार डाल दिए। हाल ही में आंध्र प्रदेश में शीर्ष नक्सली नेता मड़वी हिड़मा एक एनकाउंटर में मारा गया।
अनंत का कहना है कि चूंकि पार्टी “डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म” के सिद्धांत पर चलती है, इसलिए किसी भी निर्णय को अंतिम रूप देने से पहले सभी साथी दस्तों से राय लेनी आवश्यक है। इसीलिए उन्हें 15 फरवरी तक समय चाहिए। यह तारीख केंद्र सरकार द्वारा तय की गई नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा — 31 मार्च 2026 — के भीतर ही आती है।
माओवादियों ने यह भी कहा है कि इस वर्ष वे पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी सप्ताह, जो 2 दिसंबर को मनाया जाता है, नहीं मनाएंगे। उनके अनुसार, यदि दोनों पक्ष सहयोग करें, तभी बातचीत का माहौल तैयार हो सकेगा।
उन्होंने केंद्र से यह भी अनुरोध किया है कि उनके निर्णय को ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित किया जाए, क्योंकि यही वह माध्यम है जिसकी मदद से उनके साथी देश और दुनिया की खबरें सुन पाते हैं।
इससे पहले, इसी वर्ष सितंबर में, केंद्रीय समिति ने भी केंद्र सरकार से समय मांगा था, लेकिन इस बार विशेष समिति ने पहली बार स्पष्ट तारीख दी है।
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