हैदराबाद। सम्मक्का–सारलम्मा महा जातरा मेला में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। तेलंगाना के मुलुगु जिले में आयोजित होने वाली मेडारम सम्मक्का–सारलम्मा महा जातरा इस वर्ष 28 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक संपन्न होगी। यह आदिवासी संस्कृति (Tribal Culture) का सबसे बड़ा और विशिष्ट मेला है, जिसमें केवल तेलंगाना ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओड़िशा से भी लाखों (Millions) श्रद्धालु सम्मिलित होंगे।
12 वीं शताब्दी से चली आ रही है परंपरा
सम्मक्का–सारलम्मा महा जातरा स्रोतों के अनुसार यह परंपरा 12वीं शताब्दी से चली आ रही है। कर्नलगंर जिले के जगित्या क्षेत्र के आदिवासी राजा मेडराजू की पुत्री सम्मक्का का विवाह मेडारम के शासक पगिड़िद्दराजू के पुत्र के साथ हुआ। इस दंपत्ति की संतान सारलम्मा और जम्पन्न हुई। कथाओं के अनुसार, पहली बार काकतीय शासक प्रतापरुद्र ने कर चुकाने में असफल पगिड़िद्दराजू पर आक्रोश व्यक्त किया और महायुद्ध हुआ।
पगिड़िद्दराजू, सम्मक्का, सारलम्मा और गोविंदराजा युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि जम्पन्न ने आत्महत्या की। उस समय से संपेङ्ग वागु को जम्पन्न वागु के नाम से जाना जाता है। सम्मक्का ने युद्धभूमि में अद्भुत साहस और युद्ध कौशल दिखाया, जिसके बाद काकतीय सेना के हाथों उसे घायल पाया गया। लेकिन सम्मक्का के अनुयायियों को उसकी पहचान के लिए एक कुंकुम-भरण प्राप्त हुआ, जिसे श्रद्धालु अब तक सम्मक्का के प्रतीक के रूप में मानते हैं।
माता का दर्शन करने आते हैं करोड़ों भक्त
इसी परंपरा के चलते हर माघ शुद्ध पौर्णिमा को यह महा जातरा आयोजित की जाती है। इस जातरा की खासियत यह है कि सभी पूजा और अनुष्ठान आदिवासी परंपराओं के अनुसार ही संपन्न होंगे। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएँ पूरी होने की आशा में सोने और गुड़ (बेल्लम) का नैवेद्य अर्पित करते हैं। सारलम्मा महा जातरा–2026 के लिए तेलंगाना सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही हैं। इस महापर्व में करोड़ों भक्त माता का दर्शन करने आते हैं, और किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए कड़े प्रबंध किए जा रहे हैं। सभी तैयारियों की प्रत्यक्ष निगरानी के लिए मंत्री और अधिकारी मेडारम में ही रहकर हर पहलू की समीक्षा कर रहे हैं।
कुल 21 विभागों के 42,027 अधिकारी और कर्मचारी तैनात
भक्तों की सुविधा और सुरक्षित दर्शन इस बार प्राथमिकता है। इस बार अनुमानित रूप से लगभग 3 करोड़ भक्त भाग लेंगे। सभी विभाग मिलकर समग्र योजना के तहत कार्य कर रहे हैं ताकि कहीं कोई बाधा न आए। कुल 21 विभागों के 42,027 अधिकारी और कर्मचारी मेडारम क्षेत्र में तैनात होंगे। अतिरिक्त 2,000 आदिवासी युवा स्वयंसेवक के रूप में सेवा देंगे।
सम्मक्का सरलम्मा जातरा किस जिले में है?
Sammakka-Saralammaजतारा तेलंगाना के मुलुगु (Mulugu) जिले में आयोजित होती है। यह भारत का सबसे बड़ा आदिवासी (Tribal) मेला माना जाता है।
Sammakka-Saralamma विद्रोह क्या है?
यह विद्रोह 17वीं शताब्दी में मेडारी आदिवासी समुदाय द्वारा दिखाए गए अंग्रेजों या स्थानीय शासकों के खिलाफ अपने अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के संघर्ष से जुड़ा हुआ है।
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