एमिटी स्कूल में बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है, जब एक बच्चा लगभग 6 घंटे तक स्कूल बस में बंद रहा। घटना से बच्चे और उसके परिवार में हड़कंप मच गया।
पिता का बयान
बच्चे के पिता ने कहा कि उनके बेटे का भविष्य दांव पर है और स्कूल की इस लापरवाही के कारण उन्हें गहरी चिंता हो रही है। उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल (International School) में एक बच्चे को बस में करीब 6 घंटे अकेला छोड़ देने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. स्कूल की घोर लापरवाही ने बच्चे को गहरे सदमे में डाल दिया. परिजनों ने बच्चे की सुरक्षा और भविष्य पर चिंता जताई है, जबकि इस घटना ने स्कूल के परिवहन और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्कूल प्रशासन जांच और जवाबदेही की बात कह रहा है।
उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर 44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की लापरवाही
उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर 44 स्थित (Amity) एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की लापरवाही से हर कोई हैरान है. जरा सोचिए…अगर कोई मासूम अकेले एक बस में सुनसान इलाके में करीब 6 घंटें तक बंद रहे, तो वो कितना डरा और सहमा होगा. बस के अंदर से अपनों को पुकारना, रोना, वो भी तब जब कोई भी सुनने वाला ना हो. इस घटना ने बच्चे के परिजनों समेत तमाम पैरेंट्स को झकझोर कर रख दिया।

वहीं अब इस मामले में बच्चे के पिता का भी दर्द सामने आया है. उन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर कहा है कि परिवार इस सदमें से उबरने की कोशिश कर रहा है लेकिन बेटे की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गहरी चिंता है।
बच्चे के पिता ने भावुक होकर कहा कि गुरुवार सुबह सब कुछ सामान्य था. रोज की तरह उनका बेटा हंसते खेलते हुए स्कूल बस में बैठकर गया. किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कुछ ही घंटे बाद पूरा परिवार दहशत में होगा. उन्होंने कहा कि जब दोपहर में पता चला कि बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा तो हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई. हर मिनट 1 साल जैसा लग रहा था, फोन पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा था. हम सिर्फ यह सोच रहे थे कि हमारा बेटा कहां है और किस हालत में है।
25KM दूर पार्किंग में मिला बच्चा
परिजनों के मुताबिक, बस को स्कूल पहुंचने के बाद करीब 25 किलोमीटर दूर एक सुनसान पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया गया. इसी बस में बच्चा सोता रह गया और स्टाफ ने बस की जांच नहीं की. काफी खोजने के बाद जब बच्चा मिला तो वह पसीने से भीगा हुआ था और घबराया हुआ था, वो लगातार रो रहा था. पिता ने बताया उसकी हालत देखकर दिल दहल गया. वह डरा हुआ था और बार-बार पूछ रहा था कि उसे बस में अकेला क्यों छोड़ दिया गया?
पिता ने यह भी कहा कि इस मामले को ज्यादा उछालना नहीं चाहते, क्योंकि इससे बच्चे पर मानसिक प्रभाव पड़ सकता है. हम इस घटना को भूलना चाहते हैं, लेकिन जो हुआ वह किसी भी अभिभावक के लिए डरावना सपना है. हमारा बेटा भी छोटा है, हम नहीं चाहते कि उसकी पढ़ाई या मानसिक स्थिति पर इसका बुरा असर पड़े।
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सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने स्कूल के ट्रांसपोर्ट सिस्टम और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आमतौर पर बस से उतरते समय ड्राइवर और स्टाफ को हर सीट की जांच करनी होती है. वहीं स्कूल में उपस्थिति दर्ज होने पर तत्काल अभिभावकों को सूचित करना चाहिए. परिजनों का आरोप है कि क्लास रजिस्टर में 32 को अनुपस्थित दिखाया गया जबकि बस अटेंडेंस में उसकी उपस्थिति मौजूद थी. ऐसे में दोनों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आ रही. वहीं स्कूल की प्रिंसिपल रेणु सिंह ने कहा कि बस में आई तकनीकी खराबी के कारण वहां बदला गया था. सभी बच्चों को दूसरी बस में स्कूल लाया गया था, लेकिन यह जांच जारी है कि संबंधित बच्चा बस में कैसे रह गया. उन्होंने कि परिवहन प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है और जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।
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