बिहार विधानसभा चुनाव के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने प्रचार अभियान की रफ्तार बढ़ा दी है। आज यानी गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य के अलग-अलग जिलों में चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। तीनों नेता एनडीए प्रत्याशियों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्मा गया है।
नीतीश ने सोशल मीडिया पर गिनाईं विकास की उपलब्धियां
इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए बिहार के विकास कार्यों का ब्योरा दिया और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा,
“साल 2005 से पहले बिहार हर क्षेत्र में पिछड़ गया था। विकास के कार्य ठप थे, भवनों का निर्माण तक नहीं होता था। देश के अन्य राज्यों के लोग बिहार को हेय दृष्टि से देखते थे।”
2005 के बाद विकास की नई इबारत
नीतीश कुमार ने आगे लिखा कि 2005 के बाद बनी नई सरकार ने आधारभूत संरचनाओं के विकास में ऐतिहासिक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में विश्वस्तरीय सड़कों, पुलों, भवनों और पर्यटन स्थलों का निर्माण हुआ, जिससे राज्य की छवि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदली है।
सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से मजबूत हुआ बिहार
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में विकास की विस्तृत सूची साझा करते हुए बताया कि पिछले दो दशकों में राज्यभर में कई बड़े पथ परियोजनाओं और एक्सप्रेस-वे का निर्माण या विस्तार हुआ है। इसमें
जेपी गंगा पथ, अटल पथ, पाटलिपथ, बिहटा-सरमेरा पथ, लोहिया पथ चक्र, पटना-गया-डोभी फोरलेन, पटना-मुजफ्फरपुर फोरलेन और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से बदलेगा राज्य का चेहरा
नीतीश कुमार ने बताया कि वर्तमान में कई एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं तेजी से निर्माणाधीन हैं — जैसे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे, आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे।
इन सड़कों के पूरा होने के बाद बिहार को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से और सशक्त रूप से जोड़ा जाएगा।
ऐतिहासिक भवनों और पर्यटन स्थलों का संरक्षण
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में बिहार के ऐतिहासिक भवनों और पर्यटन स्थलों के संरक्षण व विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नालंदा, राजगीर, बोधगया, वैशाली और पटना जैसे ऐतिहासिक शहरों में पर्यटन बुनियादी ढांचे का विस्तार कर राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दी गई है।
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