Bihar- निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री परिवारवाद के मुद्दे पर घिरे नीतीश

By Anuj Kumar | Updated: March 9, 2026 • 2:39 PM

पटना । बिहार की राजनीति में दशकों तक वंशवाद के प्रखर विरोधी रहे मुख्यमंत्री (Nitish Kumar) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने उनके राजनीतिक सिद्धांतों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में (Lalu Prasad Yadav) और Indian National Congress के परिवारवाद की आलोचना करने वाले नीतीश ने आखिरकार अपने बेटे (Nishant Kumar) को राजनीति में उतरने की अनुमति दे दी है। शनिवार को निशांत ने Janata Dal (United) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके बाद बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नीतीश भी अब उसी रास्ते पर चल पड़े हैं, जिसका वे लंबे समय से विरोध करते आए थे।

पुराने बयानों के घेरे में नीतीश

अब मुख्यमंत्री Nitish Kumar अपने ही पुराने बयानों के कारण आलोचनाओं के घेरे में हैं। विरोधियों का कहना है कि बेटे के मोह में उन्होंने अपने राजनीतिक सिद्धांतों और वर्षों से बनाई छवि को दांव पर लगा दिया है। ऐसे में अब उनके लिए राजद या कांग्रेस के परिवारवाद पर हमला करना पहले जैसा आसान नहीं रह गया है। निशांत कुमार की जेडीयू में एंट्री को सिर्फ एक नए नेता के आगमन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बिहार की उस एंटी-फैमिली राजनीति के एक बड़े अध्याय के अंत के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसकी अगुवाई कभी खुद नीतीश कुमार करते थे।

कर्पूरी ठाकुर की विरासत का हवाला

नीतीश कुमार खुद को हमेशा जननायक Karpoori Thakur का सच्चा अनुयायी बताते रहे हैं। कर्पूरी ठाकुर ने अपने जीवनकाल में अपने परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया था। नीतीश ने भी लंबे समय तक इसी सिद्धांत का पालन करते हुए अपने परिवार को सत्ता और राजनीति से दूर रखा। पिछले एक साल से निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग उठ रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री की चुप्पी को उनकी असहमति के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि हाल के दिनों में उनके राज्यसभा जाने की चर्चा और बेटे को सक्रिय राजनीति में लाने के फैसले ने विरोधियों को आलोचना का बड़ा मौका दे दिया है।

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परिवारवाद पर पहले भी दे चुके हैं कड़े बयान

समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेता माने जाने वाले Nitish Kumar कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि परिवारवाद लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने Indian National Congress और Rashtriya Janata Dal पर इस मुद्दे को लेकर कई बार तीखे हमले किए। साल 2017 में जब Rahul Gandhi ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान वंशवाद को भारतीय राजनीति की वास्तविकता बताया था, तब नीतीश कुमार ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि केवल किसी राजनीतिक परिवार में जन्म लेने से कोई व्यक्ति शासन करने के योग्य नहीं हो जाता और गैर-परिवारवादी नेता अक्सर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

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