हरिद्वार,। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरकी पैड़ी (Harki Paidi) में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। घाटों की व्यवस्था देखने वाली संस्था गंगा सभा ने हरकी पैड़ी क्षेत्र में पोस्टर चस्पा कर दिए हैं, जिन पर लिखा है, ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र (No Hindu Entry Zone)’। ये पोस्टर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और समाज में नई बहस छिड़ गई है।
गंगा सभा ने पोस्टर लगाए, विवाद बढ़ा
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम (Nitin Gautam) ने पोस्टर लगाए जाने का बचाव करते हुए कहा कि कानून और नियमों की जानकारी हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पोस्टर इस उद्देश्य से लगाए गए हैं ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे और धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन न हो।
1916 के म्यूनिसिपल बायलॉज का हवाला
गंगा सभा ने प्रशासन से मांग की कि हरकी पैड़ी को सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र मानते हुए 1916 के म्यूनिसिपल बायलॉज का सख्ती से पालन कराया जाए। संस्था का दावा है कि इन बायलॉज के तहत हरकी पैड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है और वर्षों से नियमों का पालन नहीं हो पा रहा।
पत्रकार और अधिकारियों के प्रवेश पर भी रोक की मांग
संस्था ने मांग की कि हरकी पैड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदू पत्रकारों और सरकारी अधिकारियों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। गंगा सभा का तर्क है कि यह क्षेत्र केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए है और गैर-धार्मिक या प्रशासनिक गतिविधियों से सनातन परंपराओं की पवित्रता प्रभावित होती है।
अन्य घाटों पर भी रोक की मांग
गंगा सभा केवल हरकी पैड़ी तक सीमित नहीं है। संस्था लगातार सरकार और जिला प्रशासन से ब्रहमकुंड, मालवीय घाट और सुभाष घाट पर भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रही है।
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प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निगाहें
इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और किसी भी निर्णय से पहले कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया जाएगा। पोस्टर लगाए जाने के बाद अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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