नई दिल्ली,। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (OM Birla) के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ने कूटनीति का एक बड़ा कदम उठाते हुए 64 देशों के संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। इन समूहों में विपक्ष के नेताओं को भी शामिल किया गया है और कई समूहों का अध्यक्ष विपक्षी सांसदों को बनाया गया है। बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदों के बीच संवाद मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।
विपक्षी नेताओं को भी मिली अहम जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी इसी तरह की कूटनीतिक पहल देखने को मिली थी, जब विदेशों में संवाद के लिए भेजे गए प्रतिनिधिमंडलों में विपक्षी नेताओं को प्राथमिकता दी गई थी। इन मैत्री समूहों में पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी. आर. बालू, गौरव गोगोई, कनिमोझी, मनीष तिवारी (Manish Tiwari) असदुद्दीन ओवैसी, डेरेक ओ’ब्रायन, सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और शशि थरूर समेत कई वरिष्ठ सांसदों को शामिल किया गया है। इसके अलावा के. सी. वेणुगोपाल, अभिषेक बनर्जी और अरविंद सावंत को भी कुछ मैत्री समूहों का अध्यक्ष बनाया गया है।
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कई देशों के साथ संसदीय संवाद
रिपोर्ट के अनुसार ये मैत्री समूह पड़ोसी देशों के अलावा यूरोप और पश्चिमी एशिया के देशों के साथ भी बनाए गए हैं। इनमें भूटान, श्रीलंका, नेपाल, जर्मनी, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, सऊदी अरब, इजराइल, अमेरिका, मालदीव, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ओमान, ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, वियतनाम, ब्राजील, मेक्सिको, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देश शामिल हैं। इन समूहों का उद्देश्य सांसदों के बीच संवाद बढ़ाना और आपसी संबंधों को मजबूत करना है। इससे पार्लियामेंट-टु-पार्लियामेंट और पीपल-टु-पीपल कनेक्ट को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक चुनौतियों पर होगा संवाद
जानकारों का कहना है कि इन मैत्री समूहों के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों से निपटने, व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा मिलेगा। यह पहला चरण है और आगे अन्य देशों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद को इजराइल, अनुराग ठाकुर को यूरोपीय संसद और निशिकांत दुबे को रूस के लिए मैत्री समूह का प्रमुख बनाया गया है। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, पहले चरण में 64 देशों के साथ मैत्री समूह स्थापित किए गए हैं और आगे अन्य देशों के साथ भी ऐसे समूह बनाए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे संवाद का अवसर देना है।
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