अग्रिम जमानत और कोर्ट की शर्तें
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पवन खेड़ा(Pawan Khera) को अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति (Justice) ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि मामले में लगाए गए आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रेरित प्रतीत होते हैं। हालांकि, राहत देने के साथ ही कोर्ट ने खेड़ा के सामने दो मुख्य शर्तें रखी हैं: पहली, उन्हें असम पुलिस की जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा और दूसरी, वे अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जा सकेंगे। यह फैसला गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत(Bail) याचिका खारिज किए जाने के बाद आया है।
विवाद की जड़: पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति के आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल 2026 को हुई, जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि असम सीएम की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और अमेरिका में ₹50,000 करोड़ की अघोषित संपत्ति है। खेड़ा का आरोप था कि इन जानकारियों को चुनावी हलफनामे में छिपाया गया। इसके जवाब में रिनिकी भुइयां ने गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई और सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें एक महिला की छवि खराब करने की कोशिश करार दिया।
अन्य पढ़े: बगीचे में प्रेम प्रसंग बना बड़ा विवाद, ग्रामीणों ने कराई जबरन शादी
कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग
कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खेड़ा के घर पर 60 पुलिसकर्मियों को भेजना केवल उन्हें डराने और प्रताड़ित करने की साजिश थी। वहीं, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें किसी से लोकतंत्र सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए झूठे दस्तावेजों का सहारा लेने वालों को कानून जल्द ही सजा देगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को जमानत देते समय क्या मुख्य निर्देश दिए हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को निर्देश दिया है कि उन्हें असम पुलिस की जांच प्रक्रिया में सहयोग करना होगा। साथ ही, वे बिना अदालत की पूर्व अनुमति के देश से बाहर (विदेश) नहीं जा सकते।
यह कानूनी विवाद किस विशिष्ट आरोप से शुरू हुआ था?
यह विवाद पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए उन आरोपों से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने असम सीएम की पत्नी के पास तीन विदेशी पासपोर्ट और विदेश में ₹50,000 करोड़ की अघोषित संपत्ति होने का दावा किया था, जिसे रिनिकी भुइयां सरमा ने आधारहीन बताते हुए केस दर्ज कराया।
अन्य पढ़े: