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PM Modi on Kanchenjunga : सिक्किम की विरासत और चेतना का प्रतीक बताया

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 25, 2026 • 5:48 PM
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मुख्य बातें: 

नई दिल्ली । सिक्किम के राज्य गठन के 51वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की सराहना करते हुए कंचनजंगा को सिक्किम (Sikkim) की भूमि, स्मृतियों और चेतना का रक्षक बताया है।

कंचनजंगा को बताया पहचान और आस्था का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Union Minister Jyotiraditya Scindia) द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि कंचनजंगा केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि सिक्किम की पहचान, आस्था और विकास यात्रा का महत्वपूर्ण प्रतीक है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सिक्किम अपने राज्यत्व के 51वें year में प्रवेश कर रहा है और इस अवसर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कंचनजंगा के महत्व को बेहद संवेदनशील और प्रेरणादायक ढंग से प्रस्तुत किया है।

“विकसित सिक्किम 2047” का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि लेख में कंचनजंगा के पांच खजानों का उल्लेख किया गया है, जो सिक्किम की प्रगति और “विकसित सिक्किम 2047” की दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।

सिंधिया ने बताया कंचनजंगा का सांस्कृतिक महत्व

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने लेख में लिखा कि कंचनजंगा का नाम आते ही हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां, प्रार्थना झंडे और बादलों से घिरी पर्वत श्रृंखलाएं आंखों के सामने उभर आती हैं। उन्होंने बताया कि सिक्किम की लगभग एक चौथाई भूमि कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है और यह क्षेत्र सदियों से स्थानीय समुदायों की आस्था और लोककथाओं का केंद्र रहा है।

“शाश्वत बर्फ के पांच खजाने” का उल्लेख

महान लामा ल्हात्सुन चेनपो ने कंचनजंगा की पांच चोटियों को “शाश्वत बर्फ के पांच खजाने” बताया था, जिनमें सोना, चांदी, रत्न, अनाज और पवित्र ग्रंथ शामिल हैं।सिंधिया ने कहा कि पहला खजाना सोना सिक्किम के लोगों और उनकी सामाजिक एकता का प्रतीक है। लेपचा, भूटिया और नेपाली समुदायों के बीच सामंजस्य और सद्भाव राज्य की सबसे बड़ी ताकत है।

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प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक विरासत की सराहना

उन्होंने बताया कि दूसरा खजाना चांदी सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को दर्शाता है। तीस्ता और रंगीत नदियां, घने जंगल, पहाड़ी ढलानों पर फैले चाय बागान और जैविक वातावरण राज्य को विशिष्ट पहचान देते हैं। तीसरे खजाने के रूप में उन्होंने सिक्किम की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। मठों, बुद्ध पार्क, भलेधुंगा स्काईवॉक और गुरु पद्मसंभव से जुड़े पवित्र स्थलों को उन्होंने राज्य की आध्यात्मिक धरोहर बताया।

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