Indore News : ज़हरीले पानी ने छीना पिता, चार बेटियां बेसहारा

By Surekha Bhosle | Updated: January 22, 2026 • 11:22 AM

इंदौर : दूषित पानी के सेवन से एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। चार बेटियों के पिता की जान चली गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर है।

बेटियों की आंखों में आंसू

पिता की यादों के सहारे जीने को मजबूर परिवार- पिता के असमय निधन से घर में सन्नाटा पसरा है। चारों बेटियों की आंखों में आंसू हैं और उनके दिल में पिता की अनगिनत यादें।

भागीरथपुरा के (Indore) एक घर में फिर मातम छा गया। एक परिवार से उनका अपना छीन लिया। चार बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। घर के कमाने वाले मुखिया की तबीयत दूषित पानी के कारण बिगड़ती और कुछ ही दिनों में वे दुनिया से रुखसत हो गए। पिता की मौत ने परिवार को एक पल में सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब क्या...।

भागीरथपुरा में रहने वाले हेमंत गायकवाड़ (Hemant Gaikwad) (50) की मंगलवार रात अस्पताल में मौत हो गई। मौत से पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन थोड़ी देर बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर ले जाने का बोल दिया। ये बात सुन परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। कुछ दिनों पहले तक जो हेमंत गायकवाड़ अपनी ई-रिक्शा से स्कूल के बच्चों को लाते ले जाते थे, वे इस दुनिया को अलविदा कह गए। इधर, प्रशासन ने उनकी मौत डायरिया से नहीं होने की बात कही है।

सालों का साथ पलों में छूट गया

हेमंत गायकवाड़ की मौत के बाद बुधवार को भागीरथपुरा स्थित उनके घर से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। पत्नी कल्पना उर्फ टीना, बड़ी बेटी रिया (22), उससे छोटी जिया (21), खुशबू (15) और सबसे छोटी मनाली (12) का रो-रोकर बूरा हाल हो गया। परिवार के लोग उन्हें ढांढ़स बंधाने की कोशिश कर रहे थे। अंतिम यात्रा पर ले जाने के दौरान परिजन फूट-फूट कर रोते रहे। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि दूषित पानी की वजह से इतने सालों का साथ चंद पलों में छूट जाएगा। पत्नी अपने पति को और बेटियां अपने पिता को आखिरी बार जाते हुए देखते हुए रो रही थी।

12 साल की मासूम ने दी पिता को मुखाग्नि

अंतिम यात्रा मालवा मील मुक्तिधाम पहुंची, जहां अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रिया शुरू की गई। हेमंत गायकवाड़ की सबसे छोटी बेटी मनाली भी मुक्तिधाम पहुंची। यह पहला मौका था, जब वह यहां आई वह भी अपने पिता को अंतिम विदाई देने। लकड़ी की शय्या पर पिता का शव रखा था। बेटी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मासूम बच्ची ने कभी सोचा भी नहीं था कि पिता को इस हालत में देखना पड़ेगा। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चाचा संजय गायकवाड़ के साथ मिलकर मनाली ने अपने पिता को मुखाग्नि दी और अपने पिता को आखिरी विदाई दी। इस पल ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर दिया। हर किसी की आंखें नम हो गई। परिजन के साथ मनाली वापस अपने घर लौटी।

अंतिम यात्रा पर जाने के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

घर के बाहर ही लगी है पितृ छाया की प्लेट

हेमंत गायकवाड़ के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने बताया कि दो साल पहले ही घर बनाया था। दोनों भाई के परिवार यहीं रहते हैं। जब घर बना था तब भाई ने ये घर के मेन गेट के ऊपर पितृ छाया की प्लेट लगवाई थी। पितृ छाया यानी पिता की छाया हमेशा घर पर बनी रहे, लेकिन इस घर से और चार बेटियों के सिर से पिता का साया ही हमेशा के लिए उठ गया। उन्होंने बताया कि भाई की सबसे बड़ी बेटी रिया का कॉलेज पूरा हो गया है, दूसरी बेटी जिया थर्ड ईयर में पढ़ाई कर रही है, तीसरी बेटी खुशबू 11वीं क्लास में और सबसे छोटी मनाली 7वीं क्लास में पढ़ाई कर रही है। उनकी पत्नी घर से सिलाई का काम करती है।

उन्होंने बताया कि बड़े भाई हेमंत की तबीयत 15 दिन पहले खराब हुई थी। दूषित पानी के कारण उन्हें दस्त की शिकायत हुई। उन्हें दवा दी, दवा से दस्त तो बंद हो गए, लेकिन उनके पैर में सूजन आ गई। पैर तक नहीं उठ रहा था, उनका पेट भी फूलने लग गया था। इसके बाद अस्पताल में दिखाया, जहां से अरविंदो अस्पताल में रेफर कर दिया। कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी। मंगलवार रात को डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। घर में कमाने वाले वे अकेले थे, वे ई-रिक्शा चलाते थे और स्कूली बच्चों को लाते-ले जाते थे। अब यहीं उम्मीद है कि सरकार आर्थिक मदद कर दें और बच्ची को नौकरी दे दी, ताकि उनका ये घर चल सके।

बेटी को सरकार से उम्मीद

हेमंत गायकवाड़ की बेटी रिया ने बताया पिता ऑटो ड्राइवर थे। जब उनकी तबीयत बिगड़ी उसके पहले तक वे रिक्शा से बच्चों को छोड़ने गए। अगर उन्हें कोई गंभीर बीमारी होती तो वे कैसे यह सब काम कर पाते, क्योंकि हमारे घर में तो वहीं कमाने वाले थे। पिता के जाने के बाद रिया की चिंता भी बढ़ गई है कि घर का खर्च कैसे चलेगा। उसे सरकार से उम्मीद है कि वे उनकी मदद कर दे और कोई नौकरी दिला दें, ताकि वे उनका घर खर्च चला सकें और उनकी बहनों की पढ़ाई पूरी करा सकें।

घर के बाहर धूल खा रहा ई-रिक्शा

हेमंत गायकवाड़ जो ई-रिक्शा चलाते थे वह उनके घर के बाहर ही पिछले कई दिनों से धूल खा रहा है। हालांकि उसे ढाक कर रखा है, लेकिन वक्त के साथ-साथ धूल की परत उस पर चढ़ चुकी है। जिस ई-रिक्शा को चलाकर अपना घर चलाते थे, अब शायद इस ई-रिक्शा को कोई नहीं चलाएगा।

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जो वेंटिलेटर पर हैं उन्हें उम्मीद और भरोसा ही आस

एकनाथ सूर्यवंशी।

इंदौर के बांबे हॉस्पिटल में तीन लोग अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। करीब 15 दिन से ज्यादा समय हो गया है। एकनाथ सूर्यवंशी पिछले काफी दिनों से अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं। परिवार को भी समझ नहीं आ रहा है कि दवा का असर हो रहा है या नहीं। बेटे नीलेश ने बताया कि पिता काफी वक्त से वेंटिलेटर पर हैं। पहले पिता अच्छे थे, 29 तारीख को उल्टी-दस्त के कारण उनकी हालत खराब हुई।

बिगड़ने पर उन्हें शेल्बी अस्पताल में भर्ती किया। 3 जनवरी की शाम को उन्हें शेल्बी से बांबे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। 4 जनवरी से वे यहां वेंटिलेटर पर हैं। नीलेश का कहना है कि उनकी दोनों किडनी फेल हो गई, लिवर भी खराब हो गया है। हार्ट और ब्रेन पर भी असर हुआ है। वे वेंटिलेटर पर हैं। उनसे मिलने भी जाते है, लेकिन वे कुछ जवाब नहीं देते।

ऐसे में परिवार भी असमंजस में है, लेकिन उम्मीद लगाए हुए हैं कि वे ठीक हो जाएंगे। इसके अलावा हीरालाल और पार्वती बाई भी अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि तीनों मरीजों के मल्टी ऑर्गन फेल्युअर है और पहले की भी बीमारियां हैं।

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