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National : स्वदेशी सुसाइड ड्रोन काल : ऊंचे आसमान से दुश्मन पर सटीक वार

Anuj Kumar
Anuj Kumar
National : स्वदेशी सुसाइड ड्रोन काल : ऊंचे आसमान से दुश्मन पर सटीक वार

नई दिल्ली । भारतीय सेना की सैन्य क्षमताओं में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। कलाम लैब्स द्वारा विकसित किया गया स्वदेशी स्ट्रैटोस्फेरिक कामीकेज ड्रोन काल अब भारतीय सेना के सामने पेश किया जा चुका है। इसे हाल ही में देवलाली नासिक (Nasik) स्थित आर्टिलरी मुख्यालय में परीक्षण के लिए उड़ाया गया, जहां इसने अपनी रेंज, ऊंचाई और सटीकता से सेना को प्रभावित किया।

यह ड्रोन 33,000 फीट (10 किमी) की ऊंचाई से ऑपरेट किया जा सकता है

यह ड्रोन विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों, जैसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह दुश्मन पर खुद को विस्फोट से उड़ाकर हमला करता है, यानी यह एक कामीकेज (Suicide) ड्रोन है। ड्रोन काल की खासियतें जो इसे गेम चेंजर बनाती हैं. यह ड्रोन 33,000 फीट (10 किमी) की ऊंचाई से ऑपरेट किया जा सकता है, जहां आमतौर पर दूसरे ड्रोन नहीं पहुंच पाते। इतनी ऊंचाई से रडार से बचना और दुश्मन पर नजर रखना आसान होता है।

लंबी रेंज

100 प्लस किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ यह दुश्मन के अंदर तक जाकर हमला कर सकता है।

सटीक विस्फोटक वारहेड

इसमें 1 किलोग्राम का विस्फोटक लगाया गया है, जो सीमित लेकिन सटीक हमला कर छोटे लक्ष्यों (जैसे वाहन, कैंप, बंकर) को ध्वस्त कर सकता है। जीपीएस-डिनाइड एनवायरनमेंट में भी

ऑपरेशन: यह ऐसे क्षेत्रों में भी काम कर सकता है जहां जीपीएस सिग्नल जाम या बंद कर दिए जाते हैं। इसके लिए इसमें अत्याधुनिक वैकल्पिक नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है।

प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता

दूर बैठकर दुश्मन के अहम ठिकानों को बिना पायलट के नष्ट करना संभव है। देवलाली में हुआ सफल परीक्षण, सेना का मिला समर्थन इस ड्रोन को भारतीय सेना के सामने प्रस्तुत किया गया और देवलाली आर्टिलरी सेंटर में इसका प्रदर्शन किया गया। सेना के अधिकारियों ने इसकी कार्यक्षमता और खासतौर पर ऊंचाई वाले मोर्चों पर संभावित उपयोग को उत्कृष्ट बताया। इस प्रकार स्वदेशी काल ड्रोन न केवल भारत की रक्षा रणनीति को आधुनिक बनाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि देश तकनीक में आत्मनिर्भर होकर सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है। आने वाले कुछ ही सालों में यह ड्रोन पाकिस्तान और चीन सीमा पर निगरानी और स्ट्राइक मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह भारत की सुरक्षा नीति के लिए एक नया और निर्णायक अध्याय है

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