नई दिल्ली,। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में कई किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के खिलाफ संभावित राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन को लेकर चर्चा की गई।
ट्रेड डील से किसानों को नुकसान की आशंका
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US trade agreement) से कृषि आयात के लिए दरवाजे खुल गए हैं, जिसका सीधा असर देश के किसानों पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में अन्य फसलें भी इस समझौते से प्रभावित हो सकती हैं। कांग्रेस के मुताबिक, किसान नेताओं ने मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवों की खेती करने वाले किसानों की आजीविका को लेकर गहरी चिंता जताई।
किन किसान संगठनों के नेता रहे मौजूद
इस बैठक में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के सुखपाल सिंह खैरा, भारतीय किसान मजदूर यूनियन (हरियाणा) के एडवोकेट अशोक बलहारा, भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के बलदेव एस. जीरा, आम किसान यूनियन के केदार सिरोही और किसान मजदूर मोर्चा (India) के गुरमनीत एस. मंगत समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
राष्ट्रीय आंदोलन की जरूरत पर मंथन
किसान नेताओं और राहुल गांधी ने कथित तौर पर इस व्यापार समझौते के विरोध में बड़े राष्ट्रीय आंदोलन की जरूरत पर विचार किया। चर्चा में किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका की रक्षा को प्राथमिक मुद्दा बताया गया।
मोदी सरकार पर पहले भी साध चुके हैं निशाना
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि सरकार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए किसानों के हितों से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा था कि सरकार चाहे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करे या विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाए, वे किसानों की आवाज उठाते रहेंगे।
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औपचारिक ऐलान का इंतजार
राजनीतिक हलकों में इस बैठक को संभावित बड़े किसान आंदोलन की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अब तक किसी औपचारिक कार्यक्रम या आंदोलन की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।
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