Latest Hindi News : आतंकी हमले पर राजनाथ सिंह का बयान, हर वार का जवाब देंगे

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राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को खत्म हुए करीब चार महीने हो चुके हैं। भारतीय सेना (Indian Army) और वायुसेना ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान (Pakistan) में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह कर पहलगाम हमले का हिसाब बराबर किया।

तीनों सेनाओं के तालमेल की मिसाल

राजधानी में वायुसेना की ओर से आयोजित संगोष्ठी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने इस सैन्य अभियान को तीनों सेनाओं के बीच तालमेल का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सुरक्षा खतरे जटिल हो गए हैं, ऐसे में कोई भी सेना अलग-थलग होकर काम नहीं कर सकती

सरकार का मकसद : एकजुटता और एकीकरण

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच एकजुटता और एकीकरण को बढ़ावा देना है। यह केवल नीतिगत नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है। संवाद, समझ और परंपराओं के सम्मान के साथ यह मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने हमें कई अहम बिंदुओं पर सीख दी—

  • एकीकृत संचालन की तस्वीर
  • समय पर निर्णय लेने की क्षमता
  • स्थिति आधारित जागरूकता में वृद्धि
  • नुकसान के जोखिम को कम करना

आईएसीसीएस बना संयुक्त संचालन का आधार

उन्होंने वायुसेना की एकीकृत वायु कमान-नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सेना के ‘आकाशतीर’ और नौसेना के ‘त्रिगुण’ के साथ मिलकर संयुक्त संचालन का मजबूत आधार बनी।

बदलते समय में संयुक्तता की आवश्यकता

रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों के बीच संयुक्तता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गई है। जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस का आपसी तालमेल ही विजय की गारंटी है।

साइबर युद्ध और मानकों की चुनौतियां

राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि विमानन सुरक्षा और साइबर युद्ध जैसे क्षेत्रों में भिन्न मानक विनाशकारी साबित हो सकते हैं। छोटी सी गलती भी व्यापक असर डाल सकती है। विरोधी हमारी कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं, इसलिए मानकों में सामंजस्य जरूरी है।

पीएम मोदी की टिप्पणी का उल्लेख

उन्होंने पीएम मोदी के हाल में कोलकाता में दिए गए भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें संयुक्तता और एकीकरण पर जोर दिया गया था। राजनाथ ने कहा कि यह सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि सशस्त्र बल न केवल परंपराओं में श्रेष्ठ हों बल्कि भविष्य के लिए तैयार भी हों।

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Anuj Kumar

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