National- रिकॉर्ड टूटा, भारतीय मुद्रा 92 के पार, आम आदमी पर बढ़ा बोझ

Read Time:  1 min
भारतीय मुद्रा
भारतीय मुद्रा
FONT SIZE
GET APP

नई दिल्ली । भारतीय रुपये (Indian Rupess) को गुरुवार को बड़ा झटका लगा, जब वह अमेरिकी डॉलर (Americi Dollar) के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.00 तक फिसल गया। डॉलर की मजबूत मांग, एशियाई मुद्राओं की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपया अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सरकार अर्थव्यवस्था की मजबूती के दावे कर रही है।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा (interbank foreign exchange) बाजार में रुपया 91.95 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 92.00 के स्तर तक टूट गया। बुधवार को भी रुपया 31 पैसे की गिरावट के साथ 91.99 पर बंद हुआ था, जो अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है।

डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव

फॉरेक्स बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने के संकेत के बाद डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया।

एशियाई मुद्राओं की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता

इसके साथ ही एशियाई मुद्राओं में व्यापक कमजोरी और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है। नतीजतन डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया लगातार कमजोर होता चला गया।

टैरिफ एलान के बाद और फिसला रुपया

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। इस साल अब तक रुपया करीब 2 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जबकि टैरिफ एलान के बाद इसमें लगभग 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

कच्चे तेल की महंगाई ने बढ़ाई चिंता

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रुपये के लिए परेशानी बढ़ा रही है। इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड में 4 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है और यह 69.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

भू-राजनीतिक तनाव से तेल आपूर्ति पर खतरा

अमेरिका द्वारा ईरान को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में तेल की महंगाई सीधे रुपये की सेहत पर असर डालती है।

92 का स्तर तकनीकी रूप से अहम

फॉरेक्स बाजार में 92.00 का स्तर तकनीकी रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्तर स्थायी रूप से टूटता है, तो रुपया 92.20 से 92.50 तक और फिसल सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से गिरावट पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है।

शेयर बाजार पर भी दिखा असर

रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 343 अंक गिरकर 82,001 पर आ गया, जबकि निफ्टी 94 अंक फिसलकर 25,248 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

अन्य पढ़े: WB- 31 मार्च तक सीमा की जमीन बीएसएफ को सौंपे बंगाल सरकार-हाईकोर्ट

मजबूत आंकड़ों के बावजूद क्यों कमजोर रुपया?

दिलचस्प बात यह है कि दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो दो साल का उच्चतम स्तर है। इसके बावजूद रुपये की गिरावट ने सवाल खड़ा कर दिया है कि मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बावजूद भारतीय मुद्रा लगातार कमजोर क्यों हो रही है। अब नजरें आरबीआई की रणनीति और वैश्विक हालात पर टिकी हैं।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।