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Jharkhand- वन्यजीवों को राहत : झारखंड में बाघ-हाथी कॉरिडोर से हटेगी रेलवे लाइन

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: April 11, 2026 • 10:39 AM
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नई दिल्ली। (Palamu Tiger Reserve) के कोर एरिया से गुजर रही रेलवे लाइन को आखिरकार डायवर्ट करने का फैसला लिया गया है। यह कदम बाघ और हाथियों के महत्वपूर्ण कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के मकसद से उठाया गया है। लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब विराम लग गया है, जिसमें तीसरी रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव को खारिज कर मौजूदा ट्रैक को कोर एरिया से बाहर शिफ्ट करने की मंजूरी दी गई है।

तीसरी रेल लाइन के प्रस्ताव पर लगा ब्रेक

सोननगर से पतरातू तक रेलवे की तीसरी लाइन परियोजना का काम कई इलाकों में तेजी से आगे बढ़ चुका है, लेकिन Palamu Tiger Reserve का कोर क्षेत्र इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। यह इलाका बाघों और हाथियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकता था।

एनओसी से शुरू हुआ विवाद, कई स्तरों पर हुई सुनवाई

मामले की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब (Rail Vikas Nigam Limited) ने तीसरी लाइन बिछाने के लिए पीटीआर प्रबंधन से एनओसी मांगा था। पीटीआर प्रशासन ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया और रेल लाइन को डायवर्ट करने की सिफारिश की। इसके बाद मामला राज्य वन्यजीव बोर्ड से होते हुए 2023 में (National Board for Wildlife) के पास पहुंचा, जहां गहन विचार-विमर्श के बाद तीसरी लाइन के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

मौजूदा ट्रैक ही होगा शिफ्ट, नया रूट तय

नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने स्पष्ट किया कि कोर एरिया में किसी भी नए ट्रैक का निर्माण वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से उचित नहीं है। इसके बजाय पहले से मौजूद दो रेल लाइनों को ही डायवर्ट कर रिजर्व क्षेत्र से बाहर करने का निर्देश दिया गया। नई योजना के तहत लातेहार जिले के छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन के बीच करीब 11 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को बदला जाएगा, जो डायवर्जन के बाद करीब 14 किलोमीटर की हो जाएगी।

टनल से सुरक्षित होगी वन्यजीवों की आवाजाही

प्रस्तावित नया ट्रैक केड गांव होकर गुजरेगा और इसका अधिकतर हिस्सा रिजर्व के बाहरी क्षेत्र से होकर निकलेगा।
हालांकि, कुछ सौ मीटर हिस्सा रिजर्व क्षेत्र में रहेगा, जहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए टनल का निर्माण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए Wildlife Institute of India की टीम ने विस्तृत अध्ययन कर पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन भी किया है।

जमीन अधिग्रहण शुरू, ग्रामीणों से लिए जा रहे सुझाव

रेलवे लाइन डायवर्जन को लेकर संयुक्त सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें जिला प्रशासन सक्रिय भूमिका निभा रहा है।प्रभावित गांवों के ग्रामीणों से सुझाव और मांगें लेकर उनकी समीक्षा की जा रही है, ताकि विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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डीपीआर तैयार, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य

रेल लाइन के रीलोकेशन का प्रस्ताव पारित हो चुका है और डीपीआर भी तैयार है। अब वन क्षेत्र से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं और जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

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