NCP पद पर संकट
राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) की महिला प्रदेश अध्यक्ष रूपाली चाकणकर एक विवाद में फंस गई हैं। उनका नाम एक ढोंगी बाबा से जुड़े मामले में सामने आया है, जिससे उनके राजनीतिक करियर पर असर पड़ सकता है।
ढोंगी बाबा से कनेक्शन
सूत्रों के अनुसार, रूपाली चाकणकर (Rupali Chakankar) का नाम एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे धोखाधड़ी और फर्जी धार्मिक गतिविधियों के आरोपों में फंसा गया है।
जांच का दायरा
पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जांच की रिपोर्ट उनके पद पर असर डाल सकती है।
स्वयंभू बाबा अशोक खरात (Ashok Kharat) की गिरफ्तारी के बाद अब रूपाली चाकणकर की एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से छुट्टी हो सकती है। बता दें कि रूपाली के अशोक खरात से संपर्क सामने आने के बाद एनसीपी उनको पद से हटा सकती है।
महाराष्ट्र में स्वयंभू बाबा की गिरफ्तार के बाद अब रूपाली चाकणकर की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। रूपाली चाकणकर की एनसीपी (अजित पवार गुट) महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से भी छुट्टी हो सकती है। रूपाली पहली ही राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। अब एनसीपी अजित पवार गुट के राज्य महिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफे को लेकर उनपर दबाव बन रहा है। पार्टी के ज्यादातर नेताओं और पदाधिकारियों की राय है कि रूपाली चाकणकर की वजह से पार्टी की छवि को धुमिल हो रही है।
पार्टी के अंदर चर्चा
दरअसल, हाल ही में गिरफ्तार ढोंगी बाबा अशोक खरात के साथ रूपाली चाकणकर के कथित संबंधों और उससे पैदा हुए राजनीतिक विवाद को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (अजित पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने ‘देवगिरी’ बंगले पर एक उच्च स्तरीय बैठक की।
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इस बैठक में रूपाली चाकणकर के भविष्य और पार्टी की छवि पर पड़ रहे असर को लेकर चर्चा हुई। ऐसे में महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि रूपाली चाकणकर को उनके दूसरे महत्वपूर्ण पद यानी एनसीपी (अजित पवार गुट) की महिला प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी से भी मुक्त किया जा सकता है।
पार्टी की छवि पर असर
हालांकि, रूपाली चाकणकर ने शुक्रवार को राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से “व्यक्तिगत कारणों” और “निष्पक्ष जांच” का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों और राजनीतिक माहौल को देखते हुए उन्हें महिला विंग के अध्यक्ष पद पर बनाए रखना एक बड़ी ‘लायबिलिटी’ साबित हो सकता है। विपक्ष द्वारा उन पर अशोक खरात को संरक्षण देने के आरोपों और उनके नार्को टेस्ट की बढ़ती मांग के बीच, पार्टी जल्द ही उन्हें संगठनात्मक पद से हटाने का औपचारिक ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि यह कदम पार्टी को आगे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए उठाया जा रहा है।
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