केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- ‘धार्मिक परंपराओं में न हो दखल’
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने आज से सबरीमाला मंदिर(Sabarimala Dispute) में महिलाओं के प्रवेश और अन्य धार्मिक स्थलों पर लैंगिक भेदभाव से जुड़े अहम मुद्दों पर अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है। केंद्र सरकार(Central Government) ने अदालत में लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा है कि भगवान अयप्पा ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ हैं और मंदिर की इस विशिष्ट परंपरा का महिलाओं की स्थिति से कोई संबंध नहीं है। सरकार का तर्क है कि अदालती हस्तक्षेप से सदियों पुरानी पूजा-पद्धति बदल सकती है, जो संविधान द्वारा संरक्षित धार्मिक विविधता के खिलाफ होगा।
पांच बड़े धार्मिक मुद्दों पर होगा फैसला
यह सुनवाई केवल सबरीमाला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में पांच बड़े विषय शामिल हैं। इनमें मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना की प्रथा, गैर-पारसी से शादी(Marriage) करने वाली पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार(Sabarimala Dispute) और मुस्लिम पर्सनल लॉ में लैंगिक भेदभाव के सवाल शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या किसी संप्रदाय की ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ (ERP) मौलिक अधिकारों से ऊपर है या उनके बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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जस्टिस नागरत्ना और सॉलिसिटर जनरल के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने मासिक धर्म (Menstruation) के आधार पर भेदभाव को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी महिला को महीने के तीन दिन ‘अछूत’ मानकर चौथे दिन सामान्य कैसे माना जा सकता है। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि यह मामला केवल एक विशेष आयु वर्ग और एक विशिष्ट मंदिर की परंपरा से जुड़ा है, न कि महिलाओं के प्रति किसी सामान्य भेदभाव से। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह गुरुद्वारे या मजार पर सिर ढकना गरिमा का हनन नहीं है, उसी तरह हर धार्मिक परंपरा को समानता की कसौटी पर नहीं तौला जाना चाहिए।
सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक का मुख्य धार्मिक आधार क्या बताया गया है?
मुख्य आधार यह है कि मंदिर के देवता भगवान अयप्पा ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ हैं और उनके इस स्वरूप की रक्षा के लिए सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत इस आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।
सुप्रीम कोर्ट की यह विशेष बेंच किन अन्य समुदायों के धार्मिक अधिकारों पर सुनवाई कर रही है?
यह बेंच सबरीमाला के अलावा मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में खतना प्रथा और पारसी महिलाओं के अग्नि मंदिर (Fire Temple) में प्रवेश के अधिकारों पर सुनवाई कर रही है।
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