SC : ने 2008 में पत्नी और 4 बच्चों की हत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की सजा घटाई

By digital@vaartha.com | Updated: April 23, 2025 • 4:49 PM

मौत की सजा को अंतिम सांस तक कारावास में बदला गया

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक व्यक्ति की मौत की सजा को बदलकर मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील कर दिया। उसे 2008 में अपनी पत्नी और चार बच्चों की नृशंस हत्या और अपनी 12 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म के बाद जान से मारने के लिये मौत की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने रेजी कुमार उर्फ रेजी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन 16-17 साल की कैद में उसके अच्छे आचरण के कारण उसकी मौत की सजा को अंतिम सांस तक कारावास में बदल दिया।

नहीं था अपराध का कोई पिछला इतिहास

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि रमेश ए नायक बनाम रजिस्ट्रार जनरल, कर्नाटक उच्च न्यायालय (2025 का फैसला) में की गई चर्चा को ध्यान में रखते हुए और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि दोषी-अपीलकर्ता का अपराध का कोई पिछला इतिहास नहीं था; पिछले 16-17 वर्षों के कारावास के दौरान उसके अच्छे आचरण; मानसिक स्वास्थ्य में कठिनाइयों और एक आदर्श कैदी बनने के लिए लगातार प्रयास को देखते हुए हम पाते हैं कि मृत्युदंड देना अनुचित होगा।

मौत की सजा संशोधित

पीठ ने कहा कि इसलिए, उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा रहा है। हालांकि, अपराध की गंभीरता, मारे गए लोगों की संख्या, जिसमें पांच में से चार उसके अपने बच्चे थे, को देखते हुए, हमारा मानना है कि उसे रिहा नहीं किया जाना चाहिए और हम निर्देश देते हैं कि वह अपनी अंतिम सांस तक जेल में बिताए ताकि वह अपने द्वारा किए गए अपराधों का प्रायश्चित कर सके। पीठ ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया और केरल उच्च न्यायालय तथा अधीनस्थ अदालत द्वारा दोषी को सुनाई गई मौत की सजा को संशोधित करते हुए उसे उसके मृत्यु होने तक कारावास में बदल दिया।

जेल में बेदाग था रेजी का आचरण

शीर्ष अदालत ने दोषी के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट के अलावा परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा। इसने पाया कि जेल में रेजी का आचरण बेदाग था – जेल अधिकारियों को उस पर भरोसा था और उसे बार-बार ऐसे पद दिए गए थे, जिनमें अनुशासन, जिम्मेदारी और विश्वसनीयता की आवश्यकता होती है।

निजी स्कूल में पढ़ रही थीं दो बेटियां

रेजी को केबल नेटवर्क ऑपरेटर अबूबकर सिद्दीकी ने पलक्कड़ के अमायुर में अपने रबर बागान में कृषि मजदूर के रूप में नियुक्त किया था। वह अपनी पत्नी लिसी और अपने दो छोटे बच्चों के साथ अमायुर में किराए के मकान में रह रहा था। उसकी दो बेटियां पाला के रामपुरम में एक निजी स्कूल में पढ़ रही थीं और एक छात्रावास में रह रही थीं।

13 जुलाई को की थी दो बच्चों की हत्या

रेजी का एक महिला के साथ शारीरिक संबंध था, जिससे उसकी मुलाकात बागान में काम करने के दौरान हुई थी। अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि रेजी ने आठ जुलाई 2008 को लिसी की गला घोंटकर हत्या कर दी थी, जबकि उसने 13 जुलाई को दो बच्चों की हत्या की थी।

बड़ी बेटी से किया बलात्कार

इसके बाद वह अपनी दो बेटियों को उनकी मां की मौत के बहाने घर ले आया और सबसे बड़ी बेटी से बलात्कार किया और उसके बाद 23 जुलाई को गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। उसने उसी दिन दूसरी बेटी को भी मार डाला। दोनों लड़कियों के शव उसी दिन घर के अंदर मिले, जबकि लिसी का शव 25 जुलाई को सेप्टिक टैंक में मिला। दो अन्य बच्चों के शव बगल की एक संपत्ति में दफन पाए गए।

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