Shashi Tharoor: शशि थरूर का स्पष्टीकरण

By Dhanarekha | Updated: January 24, 2026 • 4:43 PM

कांग्रेस के स्टैंड पर कोई विरोध नहीं, केवल सिद्धांतों की बात

तिरुवनंतपुरम: शशि थरूर(Shashi Tharoor) ने कहा कि उन्होंने कभी भी संसद में कांग्रेस(Congress) के आधिकारिक स्टैंड का विरोध नहीं किया है। एकमात्र मुद्दा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का था, जहाँ उनके विचार पार्टी से अलग थे। थरूर ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर उनका स्टैंड सिद्धांतों पर आधारित था और वे इसके लिए कोई माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने पहलगाम की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी वारदातों का जवाब देना जरूरी है, लेकिन भारत को पाकिस्तान के साथ लंबे संघर्ष के बजाय विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए

नेहरू के विचारों और राष्ट्रवाद पर जोर

फेस्टिवल के दौरान थरूर(Shashi Tharoor) ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उदाहरण देते हुए राष्ट्रवाद पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नेहरू(Nehru) का मानना था कि जब देश की सुरक्षा और वैश्विक स्थिति की बात आती है, तो भारत सबसे पहले होना चाहिए। थरूर के अनुसार, राजनीतिक दलों के बीच आंतरिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय हित की हो, तो केवल भारत की जीत सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सैन्य कार्रवाई को केवल आतंकवादी शिविरों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।

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पार्टी मीटिंग से दूरी और मीडिया की अटकलें

पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल न होने और नेतृत्व के साथ कथित अनबन की खबरों पर थरूर ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी कहना था, उन्होंने(Shashi Tharoor) पार्टी नेतृत्व को बता दिया है और इसे सार्वजनिक करना उचित नहीं है। कोझिकोड के कार्यक्रम में शामिल होने और दिल्ली न जाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि व्यस्त कार्यक्रमों के कारण अंतिम समय में बदलाव करना संभव नहीं था। उन्होंने मीडिया की अटकलों को किनारे करते हुए इसे केवल एक लॉजिस्टिक समस्या बताया।

शशि थरूर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मुद्दे पर माफी मांगने से क्यों इनकार किया?

थरूर(Shashi Tharoor) का मानना है कि इस मुद्दे पर उनका स्टैंड सिद्धांतों पर आधारित था। उनका तर्क है कि भारत को पाकिस्तान के साथ निरंतर संघर्ष में उलझने के बजाय अपनी प्रगति और विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

राष्ट्रीय हित के बारे में शशि थरूर का मुख्य संदेश क्या था?

थरूर ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की साख का सवाल आए, तो सभी को एकजुट होकर भारत की जीत को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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