नई दिल्ली। भारत में चीनी उत्पादन को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है, जहां लगातार दूसरे साल भी देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत की तुलना में कम रहने की संभावना है।
उत्पादन घटा, मांग बनी ऊंची
गन्ने की कम पैदावार और चीनी मिलों (Sugar Mills ) के समय से पहले बंद होने के कारण उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में स्थानीय बाजारों में चीनी (Sugar) की कीमतों में बड़ा उछाल देखा जा सकता है।
मांग और उत्पादन के बीच बढ़ता अंतर
मुंबई स्थित वैश्विक व्यापार कंपनियों और उद्योग संगठनों के विश्लेषण के अनुसार, इस सीजन में कुल चीनी उत्पादन 2.8 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद नहीं है, जबकि देश की वार्षिक घरेलू मांग लगभग 2.9 करोड़ टन के करीब बनी हुई है।उत्पादन में इस कमी का मुख्य कारण गन्ने की फसल पर मौसम की मार और मिलों का जल्द परिचालन बंद करना है।
समय से पहले बंद हुईं सैकड़ों मिलें
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल देश की 541 चीनी मिलों में से 467 मिलें मार्च के अंत तक ही बंद हो चुकी हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक यह संख्या 420 थी।
प्रमुख राज्यों में उत्पादन प्रभावित
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मिलों का काम अनुमान से काफी पहले सिमट गया है। अत्यधिक और बेमौसम बारिश ने गन्ने की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
शुरुआती बढ़त के बावजूद गिरा कुल उत्पादन
हालांकि विपणन वर्ष 2025/26 की पहली छमाही में उत्पादन पिछले साल की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया था, लेकिन सीजन के अंतिम चरण में मिलों के तेजी से बंद होने ने शुरुआती अनुमानों को गलत साबित कर दिया।
अनुमान से काफी कम रह गया उत्पादन
पहले इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने 3.1 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, जो अब वास्तविकता से काफी दूर नजर आ रहा है।
निर्यात बढ़ने से घटा घरेलू स्टॉक
स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है सरकार द्वारा निर्यात कोटे में की गई वृद्धि ने। फरवरी में निर्यात कोटा बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया गया, जिससे घरेलू भंडार में और कमी आई है।
बफर स्टॉक में गिरावट से बढ़ेगी चिंता
जानकारों का कहना है कि सीजन की शुरुआत 50 लाख टन के शुरुआती भंडार के साथ हुई थी, लेकिन उत्पादन में गिरावट और निर्यात के चलते अगला सीजन 40 लाख टन से भी कम के स्टॉक के साथ शुरू होगा।
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आम जनता पर पड़ेगा असर
घरेलू खपत को पूरा करने की चुनौती और घटते बफर स्टॉक के कारण बाजार में आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। चीनी मिलों के जल्द बंद होने और सरप्लस की कमी ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में चीनी की कीमतों में उछाल तय है।
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