देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर (MBA Last Semestor) के छात्र द्वारा फीस जमा करने के लिए किडनी बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिहार के समस्तीपुर (Samstipur) निवासी आयुष कुमार उस समय पुलिस के संपर्क में आया, जब ऑपरेशन के बाद उसे तय रकम नहीं मिली और वह अपनी बकाया राशि की शिकायत लेकर पहुंचा।
मजबूरी में उठाया खौफनाक कदम
छात्र ने पुलिस को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने और पिता की आत्महत्या के बाद पढ़ाई छूटने के डर से उसने यह खतरनाक फैसला लिया। उसके अनुसार, किडनी का सौदा 9 लाख रुपये में तय हुआ था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए गए।
टेलीग्राम के जरिए गिरोह से संपर्क
जांच में सामने आया है कि आयुष करीब छह महीने पहले टेलीग्राम (Telegram) पर एक किडनी डोनर ग्रुप के संपर्क में आया था। पहले उसने शिक्षा ऋण लेने की कोशिश की, लेकिन सफलता न मिलने पर उसने किडनी बेचने का निर्णय लिया। डॉक्टर अफजल और डॉक्टर वैभव उसे कानपुर लेकर गए, जहां ऑपरेशन किया गया।
साइबर अपराध से भी जुड़ा रहा छात्र
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पीड़ित छात्र खुद भी साइबर अपराधों से जुड़ा रहा है और उसने कई फर्जी म्यूल अकाउंट बनवाए थे। इस पहलू की भी जांच जारी है।
बड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़
मामले की गहराई से जांच करने पर पुलिस ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया है। कानपुर पुलिस ने इस सिलसिले में आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार किया है।
कई बड़े अस्पताल जांच के दायरे में
जांच के दौरान लखनऊ और नोएडा के कई बड़े अस्पताल भी पुलिस के रडार पर आ गए हैं, जहां गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को अवैध रूप से शिफ्ट किया जाता था। एसीपी आशुतोष कुमार के अनुसार, इन अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध है।
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जल्द हो सकती हैं और गिरफ्तारियां
फिलहाल पुलिस फरार चल रहे दो अन्य डॉक्टरों और चार सहयोगियों की तलाश में जुटी है, जो इस अवैध मानव अंग व्यापार नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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