गर्मी में कौन-कौन सी समस्याएं बढ़ सकती हैं?
हाई ब्लड प्रेशर (BP)
- हीट स्ट्रेस से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
- अधिक पसीना निकलने से डिहाइड्रेशन होता है, जिससे ब्लड प्रेशर गड़बड़ा सकता है।
डायबिटीज़ (शुगर)– गर्मी में इंसुलिन की प्रभावशीलता घट सकती है। अधिक पसीना आने से ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा)।
अस्थमा (Asthma)- गर्मी और उमस से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
धूल, धुआं और प्रदूषण से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ता है।
डॉक्टर्स की सलाह: क्या सावधानियां रखें? हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी पीएं। नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी लें। दवाएं समय पर लें-बीपी और शुगर की दवाएं नियमित लें। इंसुलिन स्टोर करने के लिए ठंडी जगह का उपयोग करें।धूप से बचें- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें। अगर निकलना जरूरी हो, तो सिर ढककर, छाता और सनग्लासेस का प्रयोग करें।
गर्मी बढ़ने से डायबिटिक लोगों को क्या दिक्कत होती है?
गर्मी सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं लाती, यह डायबिटिक पेशेंट्स को भी प्रभावित करती है। खासकर जब टेम्परेचर 35°C से ऊपर चला जाए, तब शरीर के अंदर का मेटाबॉलिज्म भी बदलने लगता है। गर्मी के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ता है, जिससे शुगर लेवल पर असर पड़ता है।
हाइपोग्लाइसीमिया (Low Blood Sugar): अगर पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो इंसुलिन से ब्लड शुगर अचानक कम हो सकता है, जिससे कमजोरी, चक्कर और सिरदर्द हो सकता है।
हाइपरग्लाइसीमिया (High Blood Sugar): पसीने के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और मौसम के अनुरूप दवाओं की सही डोज न होने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
गर्मी बढ़ने पर अस्थमा के पेशेंट्स को क्या समस्या होती है?
गर्मी बढ़ने पर हवा की क्वालिटी, नमी और एलर्जन लेवल सबकुछ प्रभावित हो सकता है। यह अस्थमा पेशेंट्स के लिए ट्रिगर पॉइंट हो सकता है। जब तापमान 35°C से ऊपर पहुंचता है, तब हवा में मौजूद पॉल्यूटेंट्स और एलर्जन्स अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे श्वसन नली में सूजन और सिकुड़न बढ़ सकती है।