National- सीएम सरमा के खिलाफ हेट स्पीच याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया

Read Time:  1 min
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
FONT SIZE
GET APP

नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा (Hemant Viswa Sarma) के कथित ‘मिया मुस्लिम’ बयानों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर दायर हेट स्पीच याचिकाओं पर सीधे सुनवाई से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को पहले असम हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी और साथ ही गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने को कहा।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhisek Manu Singhwi) ने दलील दी कि असम के ‘बॉस’ के खिलाफ एसआईटी रिपोर्ट कौन देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आदतन ऐसे बयान देते रहे हैं, संविधान की शपथ का उल्लंघन कर रहे हैं और अब तक उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। सिंहवी ने सात ऐसे मामलों का हवाला दिया, जिनमें शीर्ष अदालत ने कार्रवाई के आदेश दिए थे।

अनुच्छेद 32 पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

यह याचिका कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) और उसकी नेता एन्नी राजा की ओर से दायर की गई थी। पीठ ने अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आने पर कड़े सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि चुनावी माहौल शुरू होते ही शीर्ष अदालत को “राजनीतिक अखाड़ा” बनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है और सीधे सुप्रीम कोर्ट आना हाईकोर्ट की शक्तियों को कमतर आंकने जैसा है।

हाईकोर्ट की भूमिका पर जोर

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले संबंधित हाईकोर्ट जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट को अपने लंबित मामलों से निपटना है और हाईकोर्ट की संवैधानिक शक्तियों पर अविश्वास उचित नहीं है। जब याचिकाकर्ता पक्ष ने यह तर्क दिया कि असम हाईकोर्ट मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाएगा, तो अदालत ने इस दलील को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया।

अन्य पढ़े: Aadhar Card- नए डिजाइन वाला आधार कार्ड, अब सिर्फ फोटो और QR कोड होगा नजर

पत्र बनाम विधिवत याचिका

एक अन्य वरिष्ठ वकील ने बताया कि कई प्रतिष्ठित नागरिकों ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि पत्र लिखना अलग बात है, जबकि विधिवत रिट याचिका दायर करने पर सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित होता है। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी और भरोसा जताया कि संबंधित अदालत मामले पर विधिसम्मत कार्रवाई करेगी।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।