Tharu tribe dowry ban : देशभर में दहेज मामलों के बढ़ते आंकड़ों के बीच बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के थारू जनजाति गांव एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। बगहा पुलिस जिले के अंतर्गत आने वाले गोबरहिया थाना क्षेत्र के थारू गांवों में पिछले दस वर्षों में दहेज से जुड़ा एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। यह संयोग नहीं, बल्कि समाज की मजबूत परंपराओं और सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।
थारू समुदाय में विवाह के दौरान दहेज लेना पाप माना जाता है। यदि किसी पर दहेज लेने का आरोप लगता है, तो समुदाय के बुजुर्गों की पंचायत बैठती है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, सामाजिक बहिष्कार जैसी कठोर सजा दी जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सामाजिक व्यवस्था कानूनी कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी है।
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इस क्षेत्र में लगभग 20 से अधिक थारू गांव हैं और पुलिस के अनुसार एक दशक से यहां (Tharu tribe dowry ban) दहेज का कोई मामला सामने नहीं आया। यहां विवाह को पवित्र संस्कार माना जाता है, लेन-देन नहीं। विवाह तय होने पर शुभ संकेत के रूप में केवल 5 या 11 रुपये दिए जाते हैं।
हर वर्ष सैकड़ों शादियाँ होने के बावजूद, डॉक्टर, इंजीनियर और सरकारी अधिकारी बनने वाले युवा भी इस परंपरा का पालन करते हैं। थारू समाज यह साबित कर रहा है कि सामाजिक संकल्प और जागरूकता से दहेज जैसी कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।
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