नई दिल्ली,। देशभर में सड़कों पर बिना बीमा चल रहे वाहनों और असुरक्षित ड्राइविंग पर लगाम लगाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम में अहम संशोधनों का प्रस्ताव पेश किया है। इन प्रस्तावित बदलावों के तहत प्रवर्तन एजेंसियों को बिना बीमा वाले वाहनों को जब्त करने का अधिकार दिया जाएगा। साथ ही पिछले तीन सालों में जिनका ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) रद्द हुआ है, उन्हें नया लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाने का प्रावधान भी जोड़ा जाएगा।
राज्यों के साथ बैठक में रखे गए प्रस्ताव
मंत्रालय ने इस सप्ताह राज्यों के परिवहन मंत्रियों और परिवहन आयुक्तों के साथ हुई बैठक में इन प्रस्तावों को शेयर किया है। इन बदलावों के तहत बीमा नियामक को वाहन की उम्र और चालान के इतिहास को ध्यान में रखते हुए बीमा की मूल प्रीमियम और देनदारियों को तय करने का अधिकार मिलेगा।
बिना बीमा चल रहे वाहनों पर सख्ती
मीडिया रिपोर्ट (Media Report) में मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि फिलहाल बड़ी संख्या में वाहन, खासकर दोपहिया वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। इसी को देखते हुए मंत्रालय ड्राइवर के इतिहास और लाइसेंस रद्द होने के मामलों को बीमा और लाइसेंस व्यवस्था से जोड़ने का प्रस्ताव लाया है।
चालान इतिहास वालों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य
संशोधन के तहत ऐसे आवेदकों के लिए ड्राइविंग टेस्ट (Driving Test) अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, जिनका चालान इतिहास असुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार दर्शाता है। हालांकि यदि लाइसेंस की समाप्ति के एक साल के भीतर नवीनीकरण कराया जाता है, तो फिलहाल ड्राइविंग टेस्ट जरूरी नहीं होता।
पूर्व परिवहन अधिकारी की राय
दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त का कहना है कि 15 साल की लाइसेंस वैधता अवधि में चालान कटना आम बात है और इसे पूरी तरह व्यक्तिपरक बना देना ठीक नहीं होगा। उनका सुझाव है कि हर नवीनीकरण से पहले ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य होना चाहिए, लेकिन लाइसेंस रद्द होने पर नए लाइसेंस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।
भारी वाहनों के लिए ग्रेडेड लाइसेंस सिस्टम
मंत्रालय ने भारी और बड़े वाहनों के लिए ग्रेडेड लाइसेंस प्रणाली लागू करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसमें ड्राइविंग अनुभव और कौशल के आधार पर लाइसेंस की पात्रता तय की जाएगी।
थर्ड पार्टी बीमा का दायरा बढ़ेगा
एक अहम प्रस्ताव के तहत थर्ड पार्टी बीमा के दायरे को बढ़ाकर निजी वाहनों में मालिक, चालक और सवारी को शामिल करने की योजना है। फिलहाल यह व्यवस्था केवल व्यावसायिक वाहनों पर लागू है।
मेडिकल सर्टिफिकेट की आयु सीमा बढ़ाने का सुझाव
इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्य आयु सीमा को 40 साल से बढ़ाकर 60 साल करने का भी सुझाव दिया गया है।
गाड़ी के इंश्योरेंस के कितने प्रकार होते हैं?
भारत में मुख्यतः तीन प्रकार के कार बीमा उपलब्ध हैं—थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, ओन डैमेज कवर और कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस।
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