“पापा आप भी साथ चलो…” – आखिरी शब्द
इंदौर में हुए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) हादसे ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। यह दुर्घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता की जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गई, जिसने एक ही पल में अपनी पत्नी और बच्चों को खो दिया। राजेश की बेटी ने हादसे से पहले मासूमियत से कहा था – “पापा, आप भी साथ चलो।”
लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। राजेश उस दिन साथ नहीं जा पाए… और वही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी टीस बन गई।
“मैं उसकी चिता भी नहीं देख पाया”
हादसे के बाद राजेश (Rajesh) का दर्द शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि वे अपनी बेटी की चिता तक नहीं देख पाए। यह अधूरापन उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रहा है।
इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड ने एक पिता की पूरी दुनिया उजाड़ दी। बिहार निवासी राजेश जैन ने कभी नहीं सोचा था कि सुरक्षित सफर के लिए जिन पत्नी और बच्चों को उन्होंने अपने चचेरे भाई के साथ भेजा था, वे सभी एक ही हादसे में हमेशा के लिए उनसे बिछड़ जाएंगे।
इस दर्दनाक हादसे में उनकी पत्नी रुचिका,(Wife Ruchika) बेटी राशि, बेटा तन्मय और चचेरा भाई कार्तिक समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई। राजेश जैन, इस हादसे में जान गंवाने वाले बिहार के विजय जैन के दामाद हैं।
परिवार से मिलने आई थी, चचेरा देवर भी साथ था
रुचिका के पति राजेश जैन ने बताया कि उनकी पत्नी बच्चों के साथ अपने माता-पिता से मिलने इंदौर आई थीं। वे 15 तारीख को बिहार से निकले थे और 17 की सुबह इंदौर पहुंचे थे।
राजेश ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने चचेरे भाई कार्तिक को भी उनके साथ भेजा था। उन्होंने कहा, “इतनी लंबी यात्रा में पत्नी और छोटे बच्चों के साथ एक लड़का होना जरूरी लगा, इसलिए छोटू को साथ भेजा था। लेकिन वह भी इस हादसे का शिकार हो गया।”
दोनों बच्चों की पढ़ाई और छुट्टियों का था प्लान
राजेश के मुताबिक बेटी राशि कक्षा 5वीं और बेटा तन्मय कक्षा 1 में बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते थे। वहीं कार्तिक ने हाल ही में 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी और उसकी छुट्टियां चल रही थीं। रुचिका बच्चों को नाना-नानी से मिलाने और पिता की देखभाल के लिए इंदौर आई थी। योजना थी कि स्कूल खुलने से पहले सभी लौट जाएंगे।
17 तारीख को रात 8 बजे हुई थी आखिरी बातचीत
राजेश ने बताया कि 17 तारीख की रात करीब 8 बजे उनकी रुचिका से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने घर का हाल-चाल पूछा और वापसी टिकट को लेकर चर्चा की। रुचिका ने रात 10 बजे फिर कॉल करने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद बात नहीं हो सकी। सुबह साले का फोन आया और हादसे की खबर मिली जिसने सब कुछ खत्म कर दिया।
बेटी राशि ने राजेश से भी इंदौर चलने की जिद की थी
राजेश भावुक होकर बताते हैं कि बेटी राशि ने उनसे इंदौर चलने की जिद की थी। उसने कहा था- पापा आप भी हमारे साथ चलो, हम घूमकर वापस आ जाएंगे। लेकिन काम के चलते मैं नहीं जा सका। मुझे क्या पता था कि अब मेरा परिवार कभी वापस नहीं आएगा।”
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माता-पिता के इलाज के लिए आई थी रुचिका
रुचिका के पिता विजय सेठिया और मां सुमन इंदौर में इलाज के लिए रुके हुए थे। ऐसे में रुचिका ने बच्चों के साथ इंदौर आने की इच्छा जताई थी, ताकि वह पिता की देखभाल भी कर सके और बच्चे भी नाना-नानी से मिल सकें।
समय से नहीं पहुंच सके, अंतिम दर्शन भी नहीं हुए
राजेश ने रुंधे गले से बताया कि वह अपने परिवार को आखिरी बार देख भी नहीं सके। हादसे की सूचना मिलते ही उन्होंने फ्लाइट बुक करने की कोशिश की, लेकिन सीधी उड़ान नहीं मिली। वह बिहार से कोलकाता होते हुए घटना के दिन बुधवार रात 9:30 बजे इंदौर पहुंचे, तब तक परिवार का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। परिजनों ने बताया कि शवों की हालत खराब होने के कारण देर करना संभव नहीं था।
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