नई दिल्ली। अमेरिका ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ (Global Tarrif) लागू कर दिया है। व्हाइट हाउस (White House) के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि यह टैरिफ तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कोई अन्य कानूनी प्राधिकरण लागू नहीं किया जाता। भारत भी इस नई व्यवस्था के तहत 10 फीसदी टैरिफ चुकाने वाले देशों में शामिल होगा।
व्हाइट हाउस की पुष्टि, भारत भी दायरे में
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी से पूछा गया कि क्या भारत को 10 फीसदी टैरिफ देना होगा और क्या यह आईईईपीए (IEEPA) के तहत लगाए गए पुराने टैरिफ की जगह लेगा तो उन्होंने साफ कहा कि हां, 10 फीसदी तब तक लागू रहेगा, जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं होता। अधिकारी ने सभी व्यापार साझेदारों को अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का पालन करने की सलाह दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बड़ा कदम
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने कहा कि 1977 के आईईईपीए कानून के तहत राष्ट्रपति को व्यापक आयात शुल्क लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं है। संविधान के मुताबिक यह शक्ति कांग्रेस के पास है। सीजेआई सहित तीन न्यायाधीशों ने बहुमत का समर्थन किया, वहीं कुछ ने असहमति जताई और प्रशासन की शक्तियों का समर्थन किया। इस फैसले से अरबों डॉलर के रेसिप्रोकल टैरिफ अमान्य हो गए हैं। अनुमान है कि सरकार को 130 से 175 अरब डॉलर तक की वसूली पर रिफंड दावों का सामना करना पड़ सकता है।

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ट्रंप का तीखा हमला, नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर
राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भयानक और हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि वह आईईईपीए के तहत 1 डॉलर भी नहीं ले सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत विदेशी हितों से प्रभावित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करने की घोषणा की। यह प्रावधान 150 दिनों तक 15 फीसदी तक का अस्थायी टैक्स लगाने की अनुमति देता है, खासकर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स घाटे को दूर करने के लिए। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 232 और सेक्शन 301 के तहत पहले से लागू टैरिफ प्रभावी रहेंगे।
भारत के लिए क्या होंगे मायने?
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि इंडिया डील जारी है, जिनमें पारस्परिक टैरिफ को 18 फीसदी तक कम किया गया था, नई कानूनी प्रक्रिया के तहत बनाए रखे जाएंगे। भारत के लिए यह स्थिति जटिल हो सकती है, क्योंकि 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ मौजूदा शुल्कों के ऊपर लागू होगा। इससे निर्यात, विशेषकर स्टील, एल्यूमिनियम, ऑटो पार्ट्स और टेक्सटाइल सेक्टर पर असर पड़ सकता है।
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