unnecessary: कॉफी ब्रेक में कर रहे समय बर्बाद सुप्रीम कोर्ट में उठा जजों को लेकर मामला

By digital | Updated: May 14, 2025 • 11:23 AM

जस्टिस कांत ने हाई कोर्ट के जजों को लेकर कहा, कुछ जज हैं जो काफी हार्ड वर्क करते हैं, लेकिन कुछ जज ऐसे भी हैं जो गैर जरूरी कॉफी ब्रेक लेते हैं, फिर लंच के लिए जो घंटा दिया जाता है वो किस काम का है।

आप भी अक्सर ऑफिस में या अपने काम के दौरान कॉफी ब्रेक पर जाते होंगे, काम के दौरान 2 से 3 बार रिफ्रेश होने के लिए कॉफी ब्रेक लेते होंगे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जजों के ज्यादा कॉफी ब्रेक लेने का मामला उठा है।

सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जजों का ज्यादा और गैर जरूरी कॉफी ब्रेक लेने का मामला सामने आया, जिसके बाद उनके परफॉर्मेंस ऑडिट की मांग की गई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ कई शिकायतें मिल रही थीं, इसी के चलते यह मामला उठाया गया है। जस्टिस कांत ने हाई कोर्ट के जजों को लेकर कहा, कुछ जज हैं जो काफी हार्ड वर्क करते हैं, लेकिन कुछ जज ऐसे भी हैं जो गैर जरूरी कॉफी ब्रेक लेते हैं, कभी कोई-कभी कोई ब्रेक लेते हैं। फिर लंच के लिए जो घंटा दिया जाता है वो किस काम का है। हमें हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ काफी शिकायतें मिल रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने आगे कहा, यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। जस्टिस कांत ने सवाल पूछते हुए कहा, हाईकोर्ट के जजों की यह क्या परफॉरमेंस है? हम कितना खर्च कर रहे हैं और क्या आउटपुट हमें मिल रहा है। अब हाई टाइम है कि हम परफॉरमेंस ऑडिट करें।

किस मामले में की टिप्पणी?

रिहाई में हुई देरी

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

सभी चार व्यक्ति एससी/एसटी या ओबीसी से हैं। कोर्ट ने इस याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट से संबंधित एक ऐसे ही मामले के साथ टैग किया जहां फैसले की घोषणा की तारीख और शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर फैसला अपलोड होने की तारीख के बारे में जानकारी मांगी गई थी। बेंच ने कहा, हमें ऐसा लगता है कि उपर्युक्त आदेशों में देखे गए मुद्दों के लिए इस अदालत को विश्लेषण और अनिवार्य दिशानिर्देशों की जरूरत होगी, ताकि दोषियों या विचाराधीन कैदियों को न्याय सिस्टम में विश्वास खोने के लिए मजबूर न किया जा सके।

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