गोबर, मूत्र और पैर से कुचले गए खरपतवार के भी मिलेंगे दाम
अब गाय का दूध ही नहीं, उनका गोबर, मूत्र और पैर से कुचले गए खरपतवार की भी कीमत मिलेगी। इसके लिए गोशालाओं में कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट लगेंगे। यहां पंचगव्य भी बनाया जाएगा। पहले चरण में आठ मंडलों में ये प्लांट लगाए जाएंगे। शुरुआत बरेली से होगी। गो सेवा आयोग और पशुपालन विभाग मिलकर इस परियोजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रदेश के हर जिले में गोशालाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। गोशालाओं में लगने वाले सीबीजी प्लांट में आसपास के किसान भी गाय का दूध, दही, गोबर व मूत्र आदि बेच सकेंगे। इससे न सिर्फ गोशालाओं की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी।
प्लांट लगने के बाद गोबर और गोमूत्र से गाय के खाने का निकल जाता है खर्चा
साथ ही गोवंशों का संवर्धन भी होगा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में गोशालाओं में सीबीजी प्लांट चल रहे हैं। प्लांट को ऑयल और गैस कंपनियों के सहयोग से स्थापित किया गया है। ग्वालियर के लालटिपारा गोशाला के स्वामी देवानंद ने बताया कि प्लांट लगने के बाद गोबर और गोमूत्र से गाय के खाने का खर्चा निकल जाता है। दूध अतिरिक्त लाभ में है।
मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल की टीम ने दी जानकारी
मध्यप्रदेश के ग्वालियर के लालटिपारा गोशाला में चल रहे सीबीजी प्लांट और पंचगव्य प्लांट के बारे में स्वामी देवानंद और सिलीगुड़ी के प्रभु गुप्ता गो सेवा आयोग आए थे। इन्होंने वहां चल रहे प्लांट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दोनों ने कम्प्रेस्ड बायो गैस और पंचगव्य उत्पादों के संबंध में नवीन प्राद्योगिकी एवं मॉडल साझा किया। बताया कि सीबीजी संयंत्र गाय के गोबर को बायो सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) और जैविक खाद में बदल देता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए स्थायी विधियों को बढ़ावा मिलता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है पंचगव्य
गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर को पानी में मिलाकर पंचगव्य बनाया जाता है। यह मिश्रण हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों और आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद विभाग के पूर्व निदेशक प्रो पीसी सक्सेना ने बताया कि पंचगव्य के उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इससे कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन की पूर्ति होती है। शरीर की शुद्धि होती है। खेत की उर्वरता बढ़ाने और कीटनाशक के रूप में किया जाता है। अभी कुछ कंपनियों द्वारा पंचगव्य तैयार किया जाता है। औषधीय पंचगव्य आधा लीटर करीब एक से डेढ़ हजार रुपये में है, जबकि खेती से जुड़ा पंचगव्य दो सौ से लेकर एक हजार रुपये तक मिलता है।
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