Amit Shah speech : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् 1875 में रचा गया था, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिस तरह उसने देशभर में जनजागरण और साहस जगाया, वही भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। शाह ने कहा कि यह गीत 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में भी मार्गदर्शक शक्ति बना रहेगा।
शाह ने वंदे मातरम् को एक अमर रचना बताया जो देशभक्ति, समर्पण और कर्तव्य की भावना जगाती है। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक समूह इसे चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि वंदे मातरम् पूरे देश की धरोहर है। उन्होंने कहा कि आज भी शहीद होने वाले सैनिकों की अंतिम सांस पर यह गीत उनके होंठों पर रहता है।
स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् ने स्वाभिमान और संघर्ष का साहस जगाया। शाह ने कहा कि बंगाल के बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने विदेशी शासन के समय भारतीय संस्कृति को जगाने के लिए यह गीत रचा था। अंग्रेजों ने इस गीत पर रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन यह पूरे देश में फैल गया।
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उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारत माता को लक्ष्मी, (Amit Shah speech) सरस्वती और दुर्गा के रूप में दर्शाता है, जो समृद्धि, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने अंतिम क्षणों में वंदे मातरम् का उच्चारण किया।
शाह ने गीत के ऐतिहासिक संदर्भ भी साझा किए 1896 में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा सार्वजनिक प्रस्तुति, 1907 में अरविंद घोष के संपादन में ‘वंदे मातरम्’ अख़बार, 1947 में AIR पर ओंकारनाथ ठाकुर द्वारा गायन, और 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे राष्ट्रीय गीत के समान दर्जा देना।
अमित शाह ने विपक्ष की अनुपस्थिति और वंदे मातरम् को लेकर उनके पुराने रुख की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और बिपिन चंद्र पाल ने इसे भारत की आत्मा का गीत कहा था, लेकिन आज कुछ नेता इसकी चर्चा को ही “अनावश्यक” बता रहे हैं।
सरकार ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पूरे वर्ष कार्यक्रमों की घोषणा की है—चार चरणों में समारोह, डाक टिकट और सिक्का, डॉक्यूमेंट्री, प्रदर्शनियां, और विश्वभर में भारतीय दूतावासों में सांस्कृतिक कार्यक्रम। रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और शहरों में डिजिटल डिस्प्ले और दीवार चित्र भी लगाए जा रहे हैं।
अंत में शाह ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरणा का स्रोत था, और अमृतकाल में विकसित भारत निर्माण की दिशा में भी यह नई पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
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