जोधपुर। एक्टिविस्ट और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की तबीयत जोधपुर सेंट्रल जेल में अचानक खराब हो गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शनिवार सुबह पुलिस उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की इमरजेंसी में लेकर पहुंची। यहां करीब डेढ़ घंटे तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका विस्तृत मेडिकल चेकअप किया।
पेट की समस्या और शरीर में दर्द की शिकायत
एम्स सूत्रों के अनुसार सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को पेट से जुड़ी समस्या की शिकायत है। इसके अलावा उन्हें शरीर के अन्य हिस्सों में भी दर्द महसूस हो रहा था। अस्पताल की इमरजेंसी में गैस्ट्रोलॉजिस्ट द्वारा उनकी जांच की गई और आवश्यक परीक्षण किए गए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस टीम उन्हें वापस जेल लेकर रवाना हो गई।
पहले भी एम्स लाया जा चुका है
बताया जा रहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब वांगचुक को इलाज के लिए एम्स लाया गया। इससे पहले शुक्रवार को भी उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गया था। जेल में रहते हुए वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत कर रहे थे, जिसे लेकर उनके परिजनों और समर्थकों ने भी चिंता जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को लगाई थी फटकार
वांगचुक की बिगड़ती सेहत को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जेल प्रशासन को फटकार लगाई थी। गुरुवार, 29 जनवरी को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने आदेश दिया था कि सोनम वांगचुक की जांच किसी सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से कराई जाए।
कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए थे कि मेडिकल जांच की पूरी रिपोर्ट 2 फरवरी तक अदालत में पेश की जाए।
आंदोलन से गिरफ्तारी तक का सफर
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक देश के जाने-माने वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे लद्दाख क्षेत्र को राज्य का दर्जा दिए जाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इसी आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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देश-विदेश में पहचान
वांगचुक पिछले चार महीनों से जोधपुर सेंट्रल जेल (Jodhpur Central Jail) में बंद हैं। उनका नाम आम जनता के बीच तब और चर्चित हुआ जब मशहूर हिंदी फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का एक प्रमुख किरदार उनके जीवन और विचारों से प्रेरित बताया गया। शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर उन्हें देश-विदेश में विशेष पहचान मिली है।
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