बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। मतदान के दोनों चरणों में राज्य के लगभग सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य फर्जी मतदान (Voter) अनुशासनहीनता और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इससे मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक निगरानी भी मजबूत होगी।
पहले-दूसरे चरण के सभी मतदान केंद्र कैमरे की निगरानी में
- पहले चरण में कुल 45,341 मतदान केंद्रों (Pollings Station) पर वेबकास्टिंग होगी।
- दूसरे चरण में 45,399 बूथों पर सीधी मॉनिटरिंग की जाएगी।
इन सभी बूथों से लाइव वीडियो फीड सीधे राज्य नियंत्रण कक्ष, जिला निर्वाचन कार्यालय और केन्द्रीय निगरानी कक्ष तक पहुंचाई जाएगी।
वेबकास्टिंग से रियल टाइम एक्शन की तैयारी
यह तकनीक इस प्रकार तैयार की गई है कि किसी भी बूथ पर अनियमितता, देरी या अव्यवस्था की स्थिति में अधिकारी तुरंत हस्तक्षेप कर सकें।
- मतदान की गति धीमी हो,
- भीड़ बढ़ जाए,
- या कोई विवाद की स्थिति बने —
तो तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
अवैध गतिविधियों पर भी होगी नजर
अगर किसी मतदान केंद्र पर अवैध हथियार, मोबाइल फोन, अनधिकृत व्यक्ति की मौजूदगी या अनुशासनहीनता दिखाई देती है, तो तुरंत कदम उठाया जाएगा। आयोग का कहना है कि यह प्रणाली मतदान में शुचिता और अनुशासन बनाए रखने में प्रभावी साबित होगी।
फर्जी मतदान पर सख्त निगरानी
वेबकास्टिंग से मतदाता यह महसूस करेंगे कि उनका वोट सुरक्षित है और कोई फर्जी मतदान नहीं कर सकता। इससे मतदान कर्मी, सुरक्षा बल और पार्टी प्रतिनिधि भी अधिक सतर्क रहेंगे। आयोग का मानना है कि यह तकनीक “भरोसा और निष्पक्षता की नई मिसाल” बनेगी।
बिहार मॉडल को दूसरे राज्यों में लागू करने की तैयारी
निर्वाचन आयोग ने सभी बूथों पर इंटरनेट कनेक्शन, वेबकैम और पावर बैकअप की व्यवस्था पूरी कर दी है। जिला से लेकर राज्य स्तर तक एकीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है।
भारत निर्वाचन आयोग भविष्य में इस बिहार मॉडल को अन्य राज्यों में लागू करने पर भी विचार कर रहा है।
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