Reliance: अंबानी का नया दांव, एआई से क्रांति

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एक लाख करोड़ का निवेश प्लान

नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज(Reliance Industries) के चेयरमैन मुकेश अंबानी(Ambani) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) में अब तक का सबसे बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। वे ‘रिलायंस इंटेलिजेंस’ नाम से नई कंपनी शुरू कर चुके हैं और इसमें एक लाख करोड़ रुपये झोंकने की तैयारी है। उनका कहना है कि जैसे जियो ने हर भारतीय को डेटा उपलब्ध कराया था, वैसे ही अब एआई को घर-घर पहुंचाना उनका सपना है

रिलायंस बनेगी टेक्नोलॉजी कंपनी

हाल ही में हुई सालाना बैठक में ‘एआई’ शब्द 80 बार इस्तेमाल किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि अंबानी रिलायंस(Reliance) को तेल और केमिकल से हटाकर टेक्नोलॉजी दिग्गज बनाना चाहते हैं। इस योजना में बड़े डेटा सेंटर, अमेरिकी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप और 100 मिलियन डॉलर के जॉइंट वेंचर शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, रिलायंस का यह कदम कंपनी के नेट एसेट वैल्यू को और मजबूत करेगा।

एनालिस्ट मयंक माहेश्वरी ने कहा कि रिलायंस अपनी ऊर्जा इकाई को जेनरेटिव एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़कर एआई को एक सर्विस की तरह उपलब्ध कराएगी। भारत फिलहाल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में पीछे है, लेकिन रिलायंस(Reliance) के पास इसे तेजी से आगे ले जाने की पूरी क्षमता है।

मेटा के साथ बड़ी साझेदारी

एजीएम में खुलासा हुआ कि रिलायंस इंटेलिजेंस और मेटा मिलकर 70:30 का जॉइंट वेंचर बना रहे हैं। इस सहयोग से अगली पीढ़ी का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा होगा, ग्लोबल पार्टनरशिप बढ़ेगी और एआई टैलेंट को आकर्षित किया जाएगा। दोनों कंपनियों ने 100 मिलियन डॉलर निवेश का वादा किया है और दिसंबर तक डील पूरी होने की उम्मीद जताई गई है। साथ ही, भारतीय व्यवसायों के लिए ओपन-सोर्स एआई मॉडल भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि नवाचार और उत्पादकता को प्रोत्साहन मिल सके।

मुकेश अंबानी का कहना है कि जियो ने डिजिटल सर्विस को हर घर तक पहुंचाया और अब रिलायंस इंटेलिजेंस एआई को उसी तरह आम बनाएगी। उनके अनुसार, एआई आने वाले दशक का सबसे बड़ा अवसर है।

मुकेश अंबानी का एआई निवेश भारत के लिए कितना अहम है?

यह निवेश भारत को वैश्विक एआई दौड़ में आगे लाने में मदद करेगा। इससे बड़े डेटा सेंटर, नई नौकरियां और मजबूत डिजिटल ढांचा तैयार होगा, जो आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास को तेज करेगा।

रिलायंस और मेटा की साझेदारी से क्या लाभ होंगे?

इस साझेदारी से भारतीय व्यवसायों को उन्नत एआई सेवाएं मिलेंगी। कंपनियां ओपन-सोर्स मॉडल का उपयोग कर सकेंगी, जिससे इनोवेशन और उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी और भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा।

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Dhanarekha

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