कोच पर आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
चंडीगढ़: चंडीगढ़(Chandigarh) के एक स्पोर्ट्स स्टेडियम में जनवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान एक 15 वर्षीय नाबालिग खिलाड़ी के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पीड़ित खिलाड़ी(The Affected Player) का आरोप है कि मैच के दौरान दो टीमों के बीच हुए विवाद का फायदा उठाकर एक नामी कोच ने उसके साथ अश्लील हरकत की। हैरानी की बात यह है कि जनवरी में ही विभिन्न पोर्टल्स और पुलिस को शिकायत देने के बावजूद, FIR दर्ज होने में लगभग डेढ़ महीने का समय लग गया और 12 मार्च 2026 को केस दर्ज किया गया।
पुलिस जांच और एकेडमी में ‘दहशत’ का माहौल
पीड़ित पक्ष और एकेडमी के मालिक ने चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से पुलिस की कार्यप्रणाली की गंभीर शिकायत की है। आरोप है कि पुलिस(Police) आरोपी को पकड़ने के बजाय शिकायतकर्ताओं और गवाहों को धमका रही है। एकेडमी परिसर में पुलिस की टीम बिना अनुमति के दाखिल हुई और एक अधिकारी के हथियार लेकर अंदर जाने से वहां मौजूद बच्चे सहम गए। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उन्हें FIR की कॉपी तक नहीं दी जा रही और गवाहों के बयानों को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
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POCSO नियमों के उल्लंघन और मानसिक तनाव के आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान POCSO एक्ट के तहत निर्धारित सुरक्षा और संवेदनशीलता के नियमों का पालन नहीं किया गया। बच्चों को बार-बार नोटिस भेजकर अलग-अलग जगहों पर बुलाया गया, जिससे उन पर भारी मानसिक दबाव और तनाव बढ़ा है। इसी बीच, मामले के शुरुआती शिकायतकर्ता ने पुलिस के दबाव और बार-बार बुलाने से परेशान होकर खुद को केस से अलग कर लिया है, जिसके बाद अब एकेडमी के मालिक ने इस लड़ाई का मोर्चा संभाला है।
चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार मामले की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या आरोपी को गिरफ्तार किया गया है?
सेक्टर-39 के SHO इंस्पेक्टर शादीलाल के अनुसार, मामले में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। हालांकि, घटना के महीनों बीत जाने के बाद भी अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को भेजी शिकायत में किन प्रमुख बातों का उल्लेख किया है?
पीड़ित पक्ष ने शिकायत में बताया है कि उन्हें FIR की कॉपी नहीं दी जा रही है, पुलिस एकेडमी में हथियार लेकर घुसकर बच्चों को डरा रही है, और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है, जो उनके कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है।
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