Muralitharan: मुरलीधरन का बड़ा बयान: मनोरंजन के आगे फीकी पड़ी गेंदबाजी

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अब ‘बिग बिजनेस’ है IPL

स्पोर्ट्स डेस्क: सनराइजर्स हैदराबाद के मुख्य कोच मुथैया मुरलीधरन(Muralitharan) ने आधुनिक क्रिकेट की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए कहा कि आज का खेल पूरी तरह से बल्लेबाजों के पक्ष में झुक गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि IPL जैसे टूर्नामेंट दर्शकों के मनोरंजन(Entertainment) और स्पॉन्सरशिप के बिजनेस पर टिके हैं। मुरलीधरन के अनुसार, यदि बॉलिंग फ्रेंडली पिचें दी गईं तो दर्शक बोर हो जाएंगे। लोग चौके-छक्के देखना चाहते हैं, इसीलिए ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ जैसे नियम लाए गए हैं। अब गेंदबाजों को मानसिक रूप से तैयार रहना होगा कि उन्हें मैदान पर मार पड़ेगी

पावरप्ले का बदलता स्वरूप और युवा निडरता

मुरलीधरन ने बताया कि खेल का व्याकरण अब पूरी तरह बदल चुका है। उनके समय में पावरप्ले(PowerPlay) के 6 ओवरों में 40-50 रन को अच्छा माना जाता था, लेकिन अब टीमें आसानी से 80 रन तक बना रही हैं। उन्होंने 23 साल के अनकैप्ड खिलाड़ी सलील अरोड़ा का उदाहरण दिया, जिन्होंने जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज को ‘नो-लुक सिक्स’ जड़ा। कोच के अनुसार, आज के युवा बल्लेबाजों में बुमराह जैसे गेंदबाजों का खौफ नहीं है, बल्कि वे उन्हें छक्का मारने का आत्मविश्वास रखते हैं।

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स्पिन गेंदबाजी की गिरती तकनीक पर चिंता

दुनिया के महानतम स्पिनर रहे मुरलीधरन ने स्पिन गेंदबाजी के गिरते स्तर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजकल के स्पिनर्स गेंद को टर्न कराने के बजाय सिर्फ तेज फेंकने की कोशिश करते हैं, जो बल्लेबाजों के लिए आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर आज के दौर में वे और शेन वॉर्न भी खेल रहे होते, तो शायद वे भी बहुत रन लुटाते। आज के दौर में अगर कोई स्पिनर 40 रन देकर एक-दो विकेट लेता है, तो उसे अच्छी गेंदबाजी मान लिया जाता है, जबकि उनके समय में यह औसत काफी कम था।

मुथैया मुरलीधरन के अनुसार ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम का खेल पर क्या असर पड़ा है?

मुरलीधरन के अनुसार, इम्पैक्ट प्लेयर नियम को खेल में मनोरंजन बढ़ाने के लिए लाया गया है। इसने बल्लेबाजों को और अधिक मजबूती दी है, जिससे अब बड़े लक्ष्य (जैसे 240+) आसानी से चेज हो रहे हैं और गेंदबाजों के लिए खेल और भी मुश्किल हो गया है।

आज के दौर के स्पिनर्स के बारे में मुरलीधरन ने क्या विशेष टिप्पणी की?

उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर तकनीक की कमी है। आजकल के बच्चे गेंद को स्पिन कराने के बजाय तेज फेंकना सीख रहे हैं। मुरलीधरन का मानना है कि जब तक गेंद टर्न नहीं होगी, तब तक बल्लेबाज को चकमा देना असंभव है।

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