Indian Sports: भारतीय खेलों में नया सवेरा

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महिलाओं में बढ़ा क्रिकेट का क्रेज, भागीदारी हुई दोगुनी

स्पोर्ट्स डेस्क: भारत में महिलाओं के बीच क्रिकेट खेलने(Indian Sports) की संख्या में अभूतपूर्व उछाल(Unprecedented Surge) आया है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, 2020 के मुकाबले अब महिलाओं की भागीदारी दोगुनी हो गई है, जहाँ पहले केवल 5% महिलाएं क्रिकेट खेलती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 10% तक पहुँच चुका है। युवा लड़कियों में यह उत्साह और भी अधिक है, 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की 16% लड़कियां अब क्रिकेट खेल रही हैं, जबकि 2020 में यह संख्या मात्र 6% थी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तो भागीदारी में 1% से 10% तक की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है

करियर के रूप में क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हालिया ऐतिहासिक सफलताओं, विशेषकर अपना पहला वनडे वर्ल्ड कप जीतने और ऑस्ट्रेलिया(Australia) पर जीत दर्ज करने के बाद, क्रिकेट अब केवल एक शौक नहीं बल्कि एक करियर विकल्प बन गया है। 15-24 वर्ष की आयु वर्ग की हर चार में से एक लड़की(Indian Sports) अब खेल को अपने करियर के रूप में देख रही है। जहाँ 2020 में केवल 16% लड़कियां खेल को करियर बनाना चाहती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 26% पर पहुँच गया है। तमिलनाडू, मध्य प्रदेश और मेघालय जैसे राज्यों में इस दिशा में काफी सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं।

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बदलता अनुपात और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ

पुरुष और महिला खिलाड़ियों के बीच का फासला भी तेजी से कम हो रहा है। 2020 में जहाँ हर 5 पुरुष खिलाड़ियों पर 1 महिला खिलाड़ी थी, वहीं अब यह अनुपात 3:1 हो गया है। हालांकि, क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे खेलों में बढ़ती भागीदारी के बावजूद ‘सुरक्षा’ अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। सर्वे में शामिल 13% उन महिलाओं ने सुरक्षा चिंताओं को प्रमुख कारण बताया, जो वर्तमान में किसी भी खेल में भाग नहीं ले रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, पारंपरिक खेलों को पछाड़कर क्रिकेट का शीर्ष पर पहुँचना भारतीय महिला खिलाड़ियों के सुनहरे भविष्य का संकेत है।

2020 की तुलना में 15 से 24 वर्ष की आयु वाली लड़कियों में क्रिकेट खेलने की भागीदारी कितनी बढ़ी है?

2020 में इस आयु वर्ग की मात्र 6% लड़कियां क्रिकेट खेलती थीं, जो अब बढ़कर 16% हो गई है।

सर्वे के अनुसार, महिला खिलाड़ियों के खेल में भाग न लेने का मुख्य कारण क्या है?

खेल में भाग न लेने वाली 13% महिलाओं ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को अपनी सबसे बड़ी बाधा बताया है।

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Dhanarekha

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