सोमानी ग्रुप ने लगाया ‘भेदभाव’ का आरोप
स्पोर्ट्स डेस्क: आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स (RR) की बिक्री प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। अमेरिकी कारोबारी काल सोमानी के नेतृत्व वाले सोमानी ग्रुप ने आरोप लगाया है कि उन्हें नीलामी(Auction) में समान अवसर नहीं दिया गया और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। ग्रुप का दावा है कि वे पिछले छह महीनों से इस रेस में सबसे आगे थे और उन्होंने अपनी $1.63 बिलियन की बोली कभी वापस नहीं ली थी, फिर भी उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
नया मालिकाना हक: मित्तल और पूनावाला की बड़ी डील
हाल ही में दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल(Aditya Mittal) ने अदार पूनावाला के साथ मिलकर राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी लगभग 15,600 करोड़ रुपये ($1.65 बिलियन) में खरीद ली है। इस सौदे के बाद मित्तल परिवार के पास 75% और अदार पूनावाला के पास 18% हिस्सा होगा। इस बदलाव के साथ ही राजस्थान रॉयल्स अब आईपीएल की सबसे महंगी टीमों में से एक बन गई है।
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विवाद का कारण: तकनीकी कमियां बनाम पारदर्शिता का अभाव
जहाँ सोमानी ग्रुप इसे भेदभाव बता रहा है, वहीं सूत्रों के अनुसार राजस्थान रॉयल्स के मौजूदा मालिकों ने उनकी बोली में तकनीकी और दस्तावेजी कमियां पाई थीं। जांच के दौरान सोमानी ग्रुप के कागजात तय मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके कारण मित्तल ग्रुप की बोली को मंजूरी दी गई। दूसरी ओर, सोमानी ग्रुप ने इन दावों को उनकी छवि खराब करने की कोशिश करार दिया है।
राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी कितने में बिकी है और नए मालिक कौन हैं?
राजस्थान रॉयल्स की 93% हिस्सेदारी करीब 15,600 करोड़ रुपये ($1.65 बिलियन) में बिकी है। इसके नए मुख्य मालिक लक्ष्मी निवास मित्तल (मित्तल ग्रुप) और अदार पूनावाला हैं।
सोमानी ग्रुप ने नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
सोमानी ग्रुप ने आरोप लगाया है कि नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी, उन्हें समान अवसर (Level playing field) नहीं दिया गया और उनकी $1.63 बिलियन की बोली को पर्याप्त फंडिंग के बावजूद दरकिनार कर दिया गया।
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