हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी (G. Kishan Reddy) ने तेलंगाना में ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों को फंड जारी करने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत बनाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता बताया। किशन रेड्डी ने कहा कि पिछले दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में राज्य की ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक फंड जारी किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का विश्वास है कि स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र मजबूत होने से जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है, चाहे क्षेत्र कितना भी दूर क्यों न हो।
जल्द ही शेष राशि जारी करेगी केंद्र सरकार
हाल ही में संपन्न ग्राम पंचायत चुनावों के बाद केंद्र सरकार जल्द ही शेष राशि जारी करेगी। 2024-25 के लिए पहली किश्त 260 करोड़ जारी की जाएगी। उपयोग प्रमाण पत्र जमा होने के बाद शेष 2,500 करोड़ रुपए फेज़ में रिलीज़ होंगे। प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए अलग बैंक खाता अनिवार्य है। खाता पीएफएमएस पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए ताकि एक विशिष्ट एजेंसी कोड प्राप्त हो। किशन रेड्डी ने कहा कि पूर्व बीआरएस सरकार ने खातों को जब्त कर फंड अन्य प्रयोजनों में डायवर्ट किए। कई सरपंचों ने फंड न मिलने पर इस्तीफा दिया और कुछ ने आत्महत्या भी की। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री ने तेलंगाना सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्र के ग्रामीण विकास प्रयासों के साथ सहयोग करे और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाए।
ग्राम पंचायत में कितना पैसा आया कैसे देखें?
ऑनलाइन माध्यम से यह जानकारी देखी जा सकती है। e-GramSwaraj पोर्टल या पंचायत लेखा प्रणाली में राज्य, जिला, मंडल और ग्राम पंचायत चुनकर फंड ट्रांसफर, योजना-वार राशि और खर्च का पूरा विवरण उपलब्ध होता है, जिससे आम नागरिक भी पारदर्शिता के साथ जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हैदराबाद में कितनी पंचायतें हैं?
नगर निगम क्षेत्र होने के कारण यहां कोई ग्राम पंचायत नहीं है। पूरा हैदराबाद ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अंतर्गत आता है, इसलिए ग्रामीण पंचायत व्यवस्था शहर की सीमा में लागू नहीं होती और शहरी प्रशासन द्वारा संचालन किया जाता है।
तेलंगाना में कितने गांव हैं?
राज्य गठन के बाद प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार लगभग बारह हजार से अधिक गांव तेलंगाना में शामिल हैं। ये गांव विभिन्न जिलों और मंडलों में फैले हुए हैं और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि तथा स्थानीय स्वशासन की रीढ़ माने जाते हैं।
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