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Cyberabad : म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश, आरोपी गिरफ्तार

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 21, 2026 • 5:37 PM
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हैदराबाद में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए Cyber Crime Police Cyberabad और एसओटी (SOT) साइबराबाद ने संयुक्त अभियान चलाकर एक बड़े म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दिलीप सिंह (27) नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो साइबर ठगों को बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। आरोपी मूल रूप से राजस्थान के नागौर का निवासी है और वर्तमान में आईडीए जीडीमेटला, कुकटपल्ली मंडल, मेडचल-मलकाजगिरी जिले में रह रहा था। पुलिस ने उसे 21 मई 2026 की सुबह गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि इन बैंक खातों का उपयोग ट्रेडिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest), ऑनलाइन गेमिंग स्कैम, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड और फर्जी स्टॉक निवेश योजनाओं जैसे कई साइबर अपराधों में किया जा रहा था।

इंस्टाग्राम विज्ञापन से शुरू हुआ साइबर नेटवर्क का खेल

पुलिस जांच के अनुसार वर्ष 2024 में आरोपी की पहचान इंस्टाग्राम पर चल रहे एक विज्ञापन के जरिए “जॉर्डन” और “पिंटू भैया” नामक अंतरराष्ट्रीय संपर्कों से हुई थी। विज्ञापन में आसान कमाई का लालच देकर बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने पर मोटा कमीशन देने की बात कही गई थी। आरोपी को सेविंग अकाउंट के बदले ₹25 हजार और करंट अकाउंट के लिए ₹50 हजार तक देने का वादा किया गया था। इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए संपर्क बढ़ाया गया और आरोपी ने अपने साथ-साथ अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए। इन खातों का इस्तेमाल अवैध रकम को ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जाता था।

पुलिस ने नकदी, मोबाइल और दर्जनों बैंक दस्तावेज किए बरामद

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ₹1.02 लाख नकद, तीन मोबाइल फोन (रियलमी, आईफोन और वीवो), 12 डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, तीन बैंक पासबुक और सात चेकबुक बरामद की हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भेजे गए 33 बैंक पासबुक भी पुलिस ने जब्त किए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है, जिनकी मदद से फर्जी तरीके से बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों तक पहुंचाए गए। अब पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।

पुलिस की जनता से अपील: बैंक अकाउंट साझा करना भी अपराध

Cyberabad Police ने आम लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, ओटीपी या केवाईसी दस्तावेज देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर “आसान पैसे” के लालच से बचने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या बैंक में शिकायत करने की सलाह दी है। अधिकारियों ने बताया कि म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों के बैंक खाते फ्रीज किए जा सकते हैं, गिरफ्तारी हो सकती है और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है तथा पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच लगातार जारी है।

म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है?

अवैध लेनदेन या साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। कई बार अपराधी दूसरे लोगों के खातों का उपयोग पैसे ट्रांसफर करने या छिपाने के लिए करते हैं। कुछ लोग अनजाने में लालच या नौकरी के बहाने अपना खाता इस्तेमाल करने देते हैं, जिससे वे कानूनी परेशानी में फंस सकते हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए किसी अनजान व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम या ओटीपी की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

म्यूल खाता क्या है?

साइबर अपराधों में उपयोग होने वाला ऐसा बैंक खाता, जिसके जरिए अवैध पैसे का लेनदेन किया जाए, म्यूल खाता कहलाता है। अपराधी अक्सर ऑनलाइन ठगी के पैसे ऐसे खातों में भेजते हैं ताकि असली पहचान छिपाई जा सके। कई मामलों में खाताधारक को इसकी पूरी जानकारी भी नहीं होती। बैंक और साइबर पुलिस ऐसे खातों की निगरानी करती हैं। सुरक्षित बैंकिंग के लिए अपने खाते की जानकारी गोपनीय रखना जरूरी माना जाता है।

घर बैठे बैठे बैंक अकाउंट कैसे खोलें?

आजकल कई बैंक ऑनलाइन वीडियो केवाईसी और मोबाइल ऐप के माध्यम से खाता खोलने की सुविधा देते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल नंबर की आवश्यकता हो सकती है। बैंक की वेबसाइट या ऐप पर फॉर्म भरने के बाद पहचान सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सत्यापन सफल होने पर खाता सक्रिय कर दिया जाता है। डिजिटल बैंकिंग के कारण बिना शाखा गए भी कई सेवाएं उपलब्ध हो गई हैं।

खाता नंबर कैसे चेक करें?

पासबुक, चेकबुक, बैंक मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से खाता नंबर देखा जा सकता है। कई बैंक एसएमएस और ईमेल के जरिए भी खाता जानकारी उपलब्ध कराते हैं। एटीएम रसीद या बैंक शाखा से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सुरक्षा कारणों से खाता नंबर केवल विश्वसनीय माध्यमों से ही देखना और साझा करना चाहिए। बैंकिंग दस्तावेजों में यह जानकारी सामान्य रूप से दर्ज रहती है।

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