महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन पर विवाद
हैदराबाद। भाजपा विधायक दल के नेता अल्लेटी महेश्वर रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) पर महिलाओं के आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें कांग्रेस को संविधान देने का श्रेय दिया गया था। इसे उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर का अपमान बताया। भाजपा नेता ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होती है, जो स्पष्ट करता है कि संविधान जनता द्वारा अपनाया गया है। ऐसे में किसी एक दल को इसका श्रेय देना गलत और भ्रामक है। अल्लेटी महेश्वर रेड्डी ने कहा कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो जनगणना (Census) के आधार पर हर दशक में की जाती है और इसे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त परिसीमन आयोग, चुनाव आयोग के परामर्श से संचालित करता है।
राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की चुप्पी पर सवाल
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित ‘हाइब्रिड पॉलिसी’ या ” जीएसडीपी मॉडल” को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि इसका अर्थ ”गांधी डेलिमिटेशन प्रोसीजर” है। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि कर योगदान के आधार पर सीटों के आवंटन का विचार गलत है। इससे आदिलाबाद और महबूबनगर जैसे पिछड़े जिलों में सीटें कम हो सकती हैं, जबकि हैदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में वृद्धि हो सकती है, जो गरीब तबकों को हाशिए पर धकेलने की साजिश हो सकती है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को एक ”राजनीतिक नाटक” करार देते हुए आरोप लगाया कि ए. रेवंत रेड्डी अपने राष्ट्रीय राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह सब कर रहे हैं।
महिला आरक्षण क्या है?
सरकार द्वारा महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में निश्चित प्रतिशत सीटें देने की व्यवस्था को महिला आरक्षण कहा जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें समान अवसर देना है। भारत में पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया है, जिससे वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होकर समाज के विकास में योगदान दे सकें।
महिलाओं को 33% आरक्षण कब दिया गया था?
स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से दिया गया था। यह प्रावधान भारतीय संविधान में जोड़ा गया, जिसके बाद पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। कई राज्यों में बाद में इसे बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया।
संसद में महिलाओं को आरक्षण क्या है?
संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है। इसके अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी। हालांकि यह व्यवस्था जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगी। इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
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