हैदराबाद। बीआरएस एमएलसी दासोजू श्रवण कुमार (Dasoju Shravan Kumar) ने गुरुवार को तेलंगाना शिक्षा विभाग की केंद्रीकृत खरीद प्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “भ्रष्टाचार आधारित मॉडल” बताया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय एमएसएमई, हथकरघा श्रमिकों और छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। हैदराबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विकेंद्रीकृत खरीद प्रणाली लागू थी, जिसमें आवासीय कल्याण संस्थाएं जिला कलेक्टरों की निगरानी में अलग-अलग टेंडर जारी करती थीं। इससे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, पद्मशाली बुनकर परिवारों, दर्जियों और छोटे उद्योगों को अवसर मिलता था। श्रवण कुमार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Chief Minister A. Revanth Reddy) के सत्ता में आने के बाद बिना किसी परामर्श के केंद्रीकृत खरीद प्रणाली लागू कर दी गई।
बीआरएस ने उठाए सवाल
उन्होंने इसे “केंद्रीकृत भ्रष्टाचार मॉडल” बताते हुए दावा किया कि हजारों करोड़ रुपये के ठेके प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (पीएमयू) के माध्यम से चुनिंदा कंपनियों को कमीशन के आधार पर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गई हैं कि छोटे व्यापारियों की भागीदारी ही खत्म हो जाए। उदाहरण के तौर पर यूनिफॉर्म आपूर्तिकर्ताओं के लिए 250 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार, नोटबुक आपूर्तिकर्ताओं के लिए 150 करोड़ रुपये कारोबार और 2 से 4 करोड़ रुपये तक की सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र की शर्त रखी गई है। बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि ट्रॉली बैग, पीटी ड्रेस और कंबल जैसी वस्तुओं के विनिर्देश निविदा प्रक्रिया से पहले सार्वजनिक नहीं किए गए। उन्होंने टेंडरों में आधार मूल्य निर्धारित न किए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे कीमतों में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ गई है।
जीओ एमएस नंबर-1 के उल्लंघन का आरोप
श्रवण कुमार ने सरकार पर वर्ष 2024 के जीओ एमएस नंबर-1 के उल्लंघन का आरोप लगाया। इस आदेश के तहत कपड़े से संबंधित उत्पादों की खरीद तेलंगाना राज्य हथकरघा बुनकर सहकारी संस्था (टेस्को/टीजीएससीओ) के माध्यम से की जानी चाहिए, ताकि लगभग 40 हजार हथकरघा परिवारों को संरक्षण मिल सके। उन्होंने हाईकोर्ट में चल रहे आदि वीरांजनैया हैंडलूम वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने सहकारी समितियों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होने की बात कही थी और टेस्को के माध्यम से खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सरकार केंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया जारी रखे हुए है और यह दावा कर रही है कि टेस्को के पास पर्याप्त आपूर्ति क्षमता नहीं है।
1,200 करोड़ रुपये के ठेके कैसे दिए जा रहे
बीआरएस एमएलसी ने सवाल उठाया कि जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था, उन्हें करीब 1,200 करोड़ रुपये के ठेके कैसे दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया बीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक छात्रों तथा हथकरघा श्रमिकों के हितों के खिलाफ “लूट आधारित शासन” का उदाहरण है। उन्होंने सभी टेंडरों को तत्काल रद्द करने और खरीद प्रक्रिया की व्यापक जांच कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो बीआरएस सतर्कता एजेंसियों और अदालत का रुख करेगी।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
जनगणना 2011 के अनुसार तेलंगाना में हिंदू आबादी लगभग 85 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। यह राज्य धार्मिक विविधता वाला क्षेत्र है, जहां हिंदुओं के साथ मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदाय भी रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में मिश्रित जनसंख्या पाई जाती है। यहां बथुकम्मा, बोनालू और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से “त्रिलिंग देशम” या “त्रिलिंग प्रदेश” के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम प्राचीन काल के तीन प्रमुख शिव मंदिरों से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा इसे तेलुगु भाषा और संस्कृति का प्रमुख क्षेत्र होने के कारण “तेलुगु भूमि” भी कहा जाता है। यह राज्य 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर बना था। इसकी राजधानी हैदराबाद है, जो आईटी और व्यापार का बड़ा केंद्र है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
मुख्य भोजन चावल आधारित होता है, जिसमें चावल रोजमर्रा के खाने का प्रमुख हिस्सा है। यहां हैदराबादी बिरयानी, पच्ची पुलुसु, साकिनालु और सरवा पिंडी जैसे व्यंजन काफी लोकप्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्वार और बाजरे से बने भोजन भी अधिक खाए जाते हैं। यहां का खाना मसालेदार और स्वादिष्ट माना जाता है। त्योहारों पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जो स्थानीय परंपरा और दक्कनी संस्कृति को दर्शाते हैं।
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