हैदराबाद। तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष कल्वकुंतला कविता (Kavitha) ने गुरुवार को फार्मा सिटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण को लेकर पूर्व बीआरएस सरकार और वर्तमान कांग्रेस सरकार दोनों पर तीखा हमला बोला। बशीरबाग प्रेस क्लब में “एंटी फार्मा सिटी संघर्ष समिति एवं तेलंगाना पीपुल्स जेएसी” के बैनर तले आयोजित सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए कविता ने आरोप लगाया कि पूर्व बीआरएस सरकार ने फार्मा सिटी परियोजना (Project) के लिए किसानों से 13,500 एकड़ भूमि अधिग्रहित की थी, जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रस्तावित “फ्यूचर सिटी” परियोजना के लिए 30 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित करने की योजना बना रही है।
टीआरएस अध्यक्ष ने भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार पर साधा निशाना
उन्होंने सरकार से फार्मा सिटी और डाटा सेंटर परियोजनाओं से होने वाले रोजगार और पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठाए। कविता ने दावा किया कि क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर गंभीर हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों की जमीन जबरन अधिग्रहित की जा रही है, जबकि प्रभावशाली भू-स्वामियों को बचाया जा रहा है। प्रभावित किसानों और आदिवासियों को समर्थन देते हुए कविता ने कहा कि वह उनकी जमीन की रक्षा के लिए किसी भी आंदोलन में भाग लेने को तैयार हैं। बैठक में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश जस्टिस चंद्र कुमार ने कहा कि रियल एस्टेट विस्तार और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण कृषि भूमि तेजी से खत्म हो रही है।
कृषि भूमि की सुरक्षा को जरूरी
उन्होंने भविष्य में खाद्य संकट से बचने के लिए कृषि भूमि की सुरक्षा को जरूरी बताया और किसानों से किए गए वादे पूरे न करने पर राजनीतिक नेताओं की आलोचना की। प्रोफेसर हरगोपाल ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर सरकारें किसानों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर रही हैं। उन्होंने पटनचेरु औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का उल्लेख करते हुए उपजाऊ कृषि भूमि के बीच प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग स्थापित करने पर सवाल उठाए। बैठक में सीपीआई, आम आदमी पार्टी, धर्म समाज पार्टी तथा विभिन्न तेलंगाना संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और फार्मा सिटी परियोजना के खिलाफ चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
जनगणना 2011 के अनुसार तेलंगाना में हिंदू आबादी लगभग 85 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। यह राज्य धार्मिक विविधता वाला क्षेत्र है, जहां हिंदुओं के साथ मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदाय भी रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में मिश्रित जनसंख्या पाई जाती है। यहां बथुकम्मा, बोनालू और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से “त्रिलिंग देशम” या “त्रिलिंग प्रदेश” के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम प्राचीन काल के तीन प्रमुख शिव मंदिरों से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा इसे तेलुगु भाषा और संस्कृति का प्रमुख क्षेत्र होने के कारण “तेलुगु भूमि” भी कहा जाता है। यह राज्य 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर बना था। इसकी राजधानी हैदराबाद है, जो आईटी और व्यापार का बड़ा केंद्र है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
मुख्य भोजन चावल आधारित होता है, जिसमें चावल रोजमर्रा के खाने का प्रमुख हिस्सा है। यहां हैदराबादी बिरयानी, पच्ची पुलुसु, साकिनालु और सरवा पिंडी जैसे व्यंजन काफी लोकप्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्वार और बाजरे से बने भोजन भी अधिक खाए जाते हैं। यहां का खाना मसालेदार और स्वादिष्ट माना जाता है। त्योहारों पर विशेष पकवान बनाए जाते हैं, जो स्थानीय परंपरा और दक्कनी संस्कृति को दर्शाते हैं।
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